अतुल कुमार "अनजान", नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ एक भारी-भरकम मंत्रिमंडल देश पर थोप दिया है। केंद्रीय मंत्री मंडल से निकाले गए 12 प्रमुख मंत्रियों को क्यों निकाला गया , इसका कोई जवाब देश के सामने प्रधानमंत्री ने नहीं दिया। विशेषकर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद , सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन और श्रम मंत्री संतोष गंगवार के निष्कासन पर देश में अटकलों का बाजार गर्म है।
अगर मंत्री अपनी जवाबदेही नहीं पूरी कर पाए तो यह पूरी तरह से एक गलत प्रपंच है। कोविद काल में सारा काम प्रधानमंत्री ने अपने हाथ में ले लिया था l प्रधानमंत्री तो ऐसा लगता था कि वह देश के स्वास्थ्य मंत्री है रोज टेलीविजन समाचार पत्रों में वक्तव्य ही वक्तव्य देते थे l स्वास्थ्य संबंधी सारे ऐलान स्वास्थ्य मंत्री नहीं प्रधानमंत्री देते थे। उक्त विचार व्यक्त करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने वर्तमान मंत्रिमंडल को अनुभवहीन लोगों की फौज की संज्ञा दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नारा दिया कि उनकी सरकार "मिनिमम गवर्नमेंट -मैक्सिमम गवर्नेंस" पर चलेगी। इस मंत्रिमंडल को देखकर ऐसा लगता है एक एक मंत्री पर प्यार तीन चार महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी लाल दिया गया है। वह कैसे अपने उत्तरदायित्व का वाहन करेंगे। पटरी से उतरी हुई अर्थव्यवस्था को कैसे बेहतर रास्ते पर लाएंगे। गृह मंत्रालय का काम खुद ही इतना बड़ा है कि अब गृहमंत्री सब के ऊपर सुपर बॉस की तरह काम करेंगे। जैसे बैंकों के अंदर देश के बड़े-बड़े चोरों और बेईमानों को हस्तक्षेप के माध्यम से हजारों करोड़ों रुपया लुटा दिया गया और बाद में उस धनराशि को "नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट" के रूप में एलान कर दिया गया l ठीक उसी तरह से मोदी मंत्रिमंडल में आधे अनुभवहीन मंत्री एनपीए हैं।
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| अतुल कुमार "अनजान" |



