सीसीएफ सागर ने डेढ़ महीने बाद टाइगर स्ट्राइक फोर्स को भेजा केस
गाड़ी की पहचान हुई, विदिशा निवासी एक अन्य पुलिसकर्मी भी घटना में लिप्त
सागर। डेढ़ महीने पुराने बांदरी रेंज के हिरण शिकार कांड में खाकी के नाम पर केवल जेल प्रहरी सैयद रजाउद्दीन संदिग्ध नहीं है। इसमें केंद्रीय जेल में पदस्थ एक अन्य अधिकारी का भी नाम सामने आ रहा है। सूत्रों की मानें तो यह अधिकारी घटनाक्रम वाली रात को शिकार वाले स्पॉट पर मौजूद था! जो बाद में वन विभाग की टीम के पहुंचने पर वहां से खिसक गया था। इस घटनाक्रम में विदिशा पुलिस के एक जवान के भी शामिल होने की चर्चा है। राहत की बात बस इतनी है कि वन विभाग ने स्थानीय सूत्र व सीसीटीवी कैमरों की मदद से शिकारकांड में शामिल स्कॉर्पियो गाड़ी की पहचान कर ली है। ये गाड़ी विदिशा निवासी एक पुलिसकर्मी की बताई जा रही है। इधर सीसीएफ अमितकुमार दुबे ने इस घटनाक्रम के डेढ़ महीन बाद पूरे की फाइल क्षेत्रीय टाइगर स्ट्राइक फोर्स को भेज दी है। उन्होंने दावा किया है कि इस घटनाक्रम की पड़ताल लायक पर्याप्त साक्ष्य हैं और टीएसएफ इस मामले में दोषियों तक पहुंच जाएगी। ्रढंग से पड़ताल हुई तो रसूखदार के चेहरे आ सकते हैं सामने
उत्तर वन मंडल के सूत्रों के अनुसार बांदरी रेंज में संदिग्ध आरोपियों द्वारा शिकार करने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी वे इस जघन्य अपराध में शामिल रहे हैं। अगर टाइगर स्ट्राइक फोर्स वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल करती है तो इस कांड में सरकार के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों के चेहरे उजागर हो सकते हैं। इसी मामले में दो ज्यादा पुलिस, जेलकर्मी के शामिल होने का संदेह है। हालांकि वन विभाग ने ये प्रकरण काफी देरी से टाइगर स्ट्राइक फोर्स को सौंपा है, इसलिए मुमकिन है कि रसूखदार अधिकारी इस मामले में लीपा-पोती कर चुके हों। यहां बता दें कि १६ जून की रात को बांदरी रेंज में वन कर्मियों को गश्त के दौरान एक स्थान पर जेल प्रहरी व कुछ अन्य लोग संदिग्ध हालात में मिले थे। बाद में यह जेलकर्मी वन कर्मियों को चकमा देकर मौके से भाग निकला। इसके बाद वन अमले को दो अलग-अलग स्थानों पर हिरण प्रजाति के जानवरों ताजा शिकार के चिन्ह मिले थे। अगले दिन इस जेलकर्मी को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन गंभीरता से प्रकरण तैयार नहीं करने के कारण इस आरोपी को उसी दिन जमानत भी मिल गई थी।
पहले मैदान में चूक पर चूक करते रहे, फिर ऑफिस में की
गर्भवती मादा के शिकार से जुड़े इस मामले में उत्तर वन मंडल की कार्यप्रणाली शुरु से ही ढील-ढाल वाली रही है। उदाहरण के लिए घटना वाली रात ही को वन अमला इस कदर चूक गया कि आरोपी हाथ में आकर भी चकमा दे गए। इसके बाद अगले दिन सही ढंग से केस डायरी तैयार नहीं करने के कारण मुख्य संदिग्ध जेल प्रहरी सैयद रजाउद्दीन को चंद घंटों के भीतर जमानत मिल गई। तीसरी बड़ी चूक ये सामने आई कि शिकार के पहले जिस पेट्रोल पंप ये सभी संदिग्ध, एक बरात में शामिल लोगों से बहसबाजी और अवैध वसूली कर रहे थे। उसकेे सीसीटीवी फुटेज वन अमला काफी दिन गुजरने के बावजूद हासिल नहीं कर पाया। मुमकिन है कि ये फुटेज अब पंप के डीवीआर से डिलीट भी हो चुके हों।
टीएसएफ पूर्णत: सक्षम, दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगे
इस मामले में हमारा अमला लगातार सक्रिय है। तकनीकी खामियों के आधार पर मुख्य आरोपी को जमानत मिल गई थी। लेकिन अब ये मामला टीएसएफ को दिया जा रहा है। वहां का अमला पूर्णत: सक्षम है। इस कांड में जो भी अन्य लोग शामिल होंगे, उन्हें सजा दिलाई जाएगी।
-अमितकुमार दुबे, सीसीएफ, सागर

