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माझी जनजाति के पर्याय हैं केवट, भोई, मल्लाह, कहार, ढीमर

पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष बिसेन ने किया कि ताब का विमोचन 


भोपाल। मध्यप्रदेश के माझी समुदाय के पर्याय केवट, मल्लाह, भोई, रायकवार, ढीमर, कहार और बाथम आदि मप्र की जनजातियां हैं, जिनको गलत व्याख्या करके पिछड़ा वर्ग में शामिल कर दिया गया है। वह भी तब, जब वास्तविक माझी जनजाति विंध्य प्रदेश अनुशंसा 7 जनवरी 1950 और अनुशंसा दिनांक 6 अगस्त 2018 की अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर अनुसूचित जनजाति क्रमांक-29 पर माझी जनजाति दर्ज है। 

यह खुलासा करने वाली किताब ‘मध्यप्रदेश में माझी आदिवासी कौन?’ का विमोचन राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने बुधवार को किया। इस मौके पर मप्र माझी जनजाति संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष टीकाराम रायकवार, राकेश कुमार कश्यप, कमलेश रायकवार, डॉ. शशिकांत रायकवार, संजय बाथम, राकेश कुमार बाथम, प्रहलाद बाथम, नरेश बाथम, गौरव बाथम, शुभम बाथम, अमित रायकवार, बालकिशन रायकवार, मनोज बाथम आदि उपस्थित थे।

मार्गदर्शक का काम करेगी अध्ययन रिपोर्ट

संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि मप्र पिछड़ा वर्ग की सूची-12 पर अंकित जातियां केवट, मल्लाह, भोई, बाथम, रायकवार, कश्यप, निषाद, ढीमर, कहार को विलोपित किया जाए। ताकि माझी जनजाति की वास्तविक जातियां होने से इनको न्याय मिल सके। संघ का कहना है कि इस अध्ययन रिपोर्ट पर बनी किताब से समाज के युवाओं और पीड़ितों को अपने संवैधानिक अधिकारों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।