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बैंकों का निजीकरण रोकने के साथ ही वेज रिवीजन किया जाए

केनरा बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सम्मेलन में महासचिव रवि कुमार ने कहा लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहें

भोपाल। बैंकिंग सेक्टर को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी, क्योंकि धीरे-धीरे बैंकों का निजीकरण  किया जा रहा है। इससे पब्लिक मनी कॉर्पोरेट सेक्टर के हाथों में चली जाएगी। साथ ही देश के विकास में योगदान देने वाले बैंकों की भूमिका सिर्फ लाभ कमाने वाली रह जाएगी। 

यह कहना है केनरा बैंक आॅफीसर्स एसोसिएशन ( सीबीओए)  के महासचिव रवि कुमार का, जोकि दो दिवसीय भोपाल प्रवास के दूसरे दिन एसोसिएशन के अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर  सीबीओए के संयुक्त महासचिव कृष्णकांत त्रिपाठी, संजय गोयल, विभू जोशी, त्रिभुवन वैडैया, पुष्कर, मीडिया प्रभारी मनीष चतुर्वेदी, कुणाल, अमित, अजित,  आयुशी,परणिता,अद्रिजा, राजीव शिरपुरकर, श्रीमती निस्बत, हरिशंकर पाण्डे  सहित बडी संख्या मे बैंक अधिकारी मौजूद थे।

बैंकिंग बचाने संघर्ष के लिए तैयार रहें

सीबीओए के राष्ट्रीय महासचिव ने बैंक अधिकारियों को आगाह किया कि, बैंकिंग उद्योग को बचाने के लिए लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि बैंकिंग उद्योग अभी निजीकरण सहित छंटनी, नई भर्ती नहीं होना, खराब ऋणों की वसूली के लिए कडेÞ प्रावधान नहीं होना आदि से जूझ रहा है। वर्तमान में बैंकिंग उद्योग बहुत उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है । उन्होंने याद दिलाया कि बैंकिंग क्षेत्र में  वेतन समझौते को 1 नवंबर 2022 से लागू होना लागू होना है। इसको लेकर  जिस के संबंध में केनरा बैंक अधिकारी संगठन ने इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए)  से बातचीत शुरू कर दी है और जल्दी ही अच्छा समझौता होने की उम्मीद है ।