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श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण जन्म उत्सव की धूम कथा श्रवण करने पहुंचे क्षेत्रीय विधायक

बेगमगंज। श्रीमद् भागवत कथा में लिखें मंत्र और श्लोक केवल भगवान की आराधना और उनके चरित्र का वर्णन ही नहीं है। श्रीमद्भागवत की कथा में वह सारे तत्व हैं जिनके माध्यम से जीव अपना तो कल्याण कर ही सकता है साथ में अपने से जुड़े हुए लोगों का भी कल्याण होता है। जीवन में व्यक्ति को अवश्य ही भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बिना आमंत्रण के भी अगर कहीं भागवत कथा हो रही है तो वहां अवश्य जाना चाहिए। इससे जीव का कल्याण ही होता है। 

उक्त बातें रतनहारी ग्राम में मरघट का मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय भागवता कथा में सागर से पधारे आचार्य बिपिन बिहारी महाराज  ने ब्यास पीठ से कहीं।

आचार्य श्री ने संतो के संबंध में कहा है कि संत का परिचय संत का भेष नहीं होता है। उनका तो मुख्य भेष उनका गुण होता है। आज के समय में कई बहुरूपिया संत भी चोला धारण कर विचरण कर रहे हैं। लेकिन आचार्य श्री ने संत के 6 गुण बताएं। जिसमें उन्होंने कहा कि संत में सहनशीलता, करुणा, सबको अपना मानना, किसी से शत्रुता ना रखना, निष्कामता एवं परोपकारी होना ही संत की असली पहचान है।  जब भी आप किसी संत या महात्मा से मिले तो इन 6 गुणों के माध्यम से उसकी पहचान कर सकते हैं। संत की पहचान होना आवश्यक है क्योंकि वही तो आपका मार्गदर्शन करते है।  कई बार कहा जाता है कि " पानी पियो छान के, संत करो जांच के" क्योंकि सच्चा संत ही आपको सदमार्ग और ईश्वर से प्रेम करना सिखा सकता है।

बिपिन बिहारी जी ने भागवत कथा के पांचवें  दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव कि वर्णन किया। जिसमें उन्होंने श्री कृष्ण से संस्कार की सीख लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि वह परमात्मा हैं उसके बाद भी वह अपने माता पिता के चरणों को प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। यह सीख भगवान श्रीकृष्ण से सभी को लेनी चाहिए। आज की युवा पीढ़ी धन कमाने में लगी हुई है लेकिन अपनी कुल धर्म और मर्यादा का पालन बहुत कम कर रहे हैं।

भागवत कथा में धूम धाम से कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जिसमें क्षेत्रीय विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत ग्रामीण मंडल अध्यक्ष जगन्नाथ यादव सरपंच भगत सिंह राजपूत भी शामिल हुए सभी के साथ कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। बिहारी जी ने जन्म उत्सव के दौरान कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के ताले टूट गए, पहरेदार सो गए, वासुदेव व देवकी बंधन मुक्त हो गए, प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है। कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। भगवान का जन्म होने के बाद वासुदेव ने भरी जमुना पार करके उन्हें गोकुल पहुंचा दिया। वहां से वह यशोदा के यहां पैदा हुई शक्तिरूपा बेटी को लेकर चले आए।  कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गीत पर भक्त जमकर झूमे। बिहारी जी ने कहा कि कंस ने वासुदेव के हाथ से कन्य रूपी शक्तिरूपा को छीनकर जमीन पर पटकना चाहा तो वह कन्या राजा कंस के हाथ से छूटकर आसमान में चली गई। शक्ति रूप में प्रकट होकर आकाशवाणी करने लगी कि कंस, तेरा वध करने वाला पैदा हो चुका है भयभीत कंस खीजता हुआ अपने महल की ओर लौट गया।

कथा के समापन पर मुख्य यजमान मेहरबान सिंह राजपूत शिक्षक, बबलू राजपूत,चंद्रेश राजपूत आदि ने व्यासपीठ की पूजा अर्चना की और प्रसादी का वितरण किया। कथा श्रवण करने के लिए काफी तादाद में महिला पुरुष दोपहर 1 बजे से शाम 4:30 बजे तक पहुंच रहे हैं।

श्रीमद् भागवत कथा

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