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ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर: भोपाल की संपत्तियों को इंदौर की बैंक में गिरवी रखकर 3 करोड़ उड़ाए

  • कैश क्रेडिट लिमिट लेकर 3 करोड़ रुपए निजी खातों में शिफ्ट करके खर्च किए

  • दो महिलाओं सहित आधा दर्जन से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ प्र्रकरण

भोपाल।
कैश के्डिट लिमिट लेकर 3 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) ने दो महिलाओं सहित आधा दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ सात साल चली लंबी जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपियों ने भोपाल की संपत्तियों को इंदौर में पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रखकर 3 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लेकर निजी कंपनियों में ट्रांसफर करने के साथ ही ऐशो आराम पर फूंक दिए।


 
दरअसल ईओडब्ल्यू को 12 जून 2019 को भोपाल निवासी दीपक भावसार ने शिकायत करते हुए आरोपी राहुल दुबे, संगीता दुबे, प्रताप नारायण दुबे, अतुल दुबे, भुवनेश्वर पांडे और स्वाति शुक्ला सहित अन्य के खिलाफ उसकी संपत्तियो को गिरवी रखवा कर राशि हड़पने के आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार उसकी भोपाल स्थित तीन बेशकीमती प्रापर्टी को इंदौर के सियागंज स्थित पंजाब नेशनल बैंक में को-लेटरल गिरवी रखकर 3 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट ली गई थी। इसके बाद आरोपियों ने इस राशि का दुरुपयोग निजी एवं पारिवारिक कंपनियों में स्थानांतरित करके किया। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित योजना के तहत कंपनी स्थापित कर शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर उसकी संपत्तियाँ गिरवी रखवाईं। इसके बदले मिले लोन राशि का दुरुपयोग किया तथा कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षर की कूटरचना कर जाली अभिलेखों का उपयोग किया। इसके बाद ईओडबल्यू ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी, 467, 468 एवं 471 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है।


फरियादी के नाम पर कंपनी और संचालन आरोपी के हाथों में

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि वर्ष 2017 में आरोपीगण द्वारा एक कंपनी खोलने के नाम पर शिकायतकर्ता को विश्वास में लिया गया। दिनांक 14 मार्च 2017 को  “Spectro Fertchem India Pvt. Ltd.”नामक कंपनी का पंजीयन कराया गया, जिसमें शिकायतकर्ता को डायरेक्टर बनाया गया। हालांकि जांच में यह सामने आया कि कंपनी का संचालन मुख्य रूप से आरोपी प्रताप नारायण दुबे एवं भुवनेश्वर पाण्डे द्वारा किया जा रहा था।


भोपाल की तीन संपत्तियों को इंदौर के बैंक में गिरवी रखा

आरोपीगण द्वारा शिकायतकर्ता की भोपाल स्थित तीन संपत्तियाँ-एक फ्लैट, एक दुकान एवं ग्राम मेण्डोरी स्थित भूमि को पंजाब नेशनल बैंक, शाखा सियागंज, इंदौर में को-लेटरल सिक्योरिटी के रूप में बंधक रखकर कंपनी के नाम से 3 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत कराई गई। जांच में पाया गया कि यह केवल व्यावसायिक प्रयोजन हेतु अस्थायी व्यवस्था की गई थी तथा फरियादी को बताया गया था कि उन्हें नियमित लाभ एवं वेतन प्रदान किया जाएगा। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2017 को एक एमओयू भी निष्पादित किया गया।


लोन राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई

जांच में खुलासा हुआ कि 3 करोड़ रुपये की स्वीकृत लिमिट में से बैंक शुल्क कटने के पश्चात लगभग 2.81 करोड़ रुपये की राशि जून 2017 से अक्टूबर 2017 के बीच विभिन्न कंपनियों के खातों में स्थानांतरित कर दी गई। जिन कंपनियों में राशि भेजी गई उनमें से अधिकांश आरोपीगण या उनके परिवारजनों के स्वामित्व से संबंधित थीं। यह रकम DD Super Bio Organic Pvt. Ltd., DD Chemicals, Swati Engicom, Mritunjay Kemtek, Ameya Agency, Ridhima Organic और  Mahakal Chemicals  जैसी कंपनियों में ट्रांसफर की गई। उपलब्ध अभिलेखों से यह भी पाया गया कि उक्त कंपनियों में वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी तथा कुछ कंपनियाँ निष्क्रिय अथवा अस्तित्वहीन पाई गईं। सर्वाधिक राशि लगभग 2.06 करोड़ रुपये DD Super Bio Organic Pvt. Ltd. में भेजी गई। शेष राशि कार्यालय किराया, गोदाम किराया, वेतन और आरोपी राहुल दुबे की निजी सुरक्षा पर खर्च की गई।


दो कारें खरीदने रेजोल्यूशन पेपर पर फर्जी हस्ताक्षर किए

जांच में पाया गया कि 18 अगस्त 2017 के एक बोर्ड रेजोल्यूशन में भुवनेश्वर पाण्डे को दो कारें खरीदने के लिए 18.50 लाख रुपये का लोन लेने की अनुमति दर्शाई गई थी। जांच में पाया गया कि इस रेजोल्यूशन में शिकायतकर्ता दीपक भावसार के हस्ताक्षर संदिग्ध थे। बैठक की कोई विधिवत कार्यवाही नहीं थी, न ही बैठक की सूचना का कोई रिकॉर्ड मिला। शिकायतकर्ता ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि उन्हें ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं थी और उन्होंने किसी कार लोन की अनुमति नहीं दी। दस्तावेजों में कंपनी का उद्देश्य कृषि उत्पादों की ट्रेडिंग बताया गया था, परंतु जांच में कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि सामने नहीं आई। फडउ अभिलेखों में भी व्यापार का प्रमाण नहीं मिला। इससे स्पष्ट हुआ कि कंपनी केवल लोन प्राप्त करने के मकसद से बनाई गई थी।

यह भी सामने आया कि ऋण राशि का उपयोग करने के पश्चात आरोपीगण द्वारा कंपनी का संचालन बंद कर दिया गया तथा वे स्थान परिवर्तन कर गए। ऋण की अदायगी नहीं किए जाने के कारण बैंक द्वारा बकाया राशि वसूली की कार्यवाही प्रारंभ की गई, जिससे शिकायतकर्ता की संपत्तियाँ नीलामी की स्थिति में आ गयीं।


पूर्व नियोजित साजिश के तहत संपत्तियों को गिरवी रखवाया

संपूर्ण जांच, दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक अभिलेख, कंपनी रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन विश्लेषण के आधार पर यह पाया गया कि आरोपीगण ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर कंपनी स्थापित की। इसके बाद संपत्तियों को बंधक रखकर ऋण प्राप्त किया, राशि का दुरुपयोग किया तथा जाली दस्तावेजों का उपयोग किया। ऐसे में प्रथम दृष्टया धारा 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक साजिश), 467 (गंभीर दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) एवं 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराध सिद्ध पाए जाने पर आरोपीगण राहुल दुबे, संगीता दुबे, प्रताप नारायण दुबे, अतुल दुबे, भुवनेश्वर पाण्डे, स्वाति शुक्ला तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में विवेचना जारी है तथा आगे की विधिसम्मत कार्यवाही की जा रही है।


जांच जारी है, जल्द ही चालानी कार्रवाई की जाएगी

आरोपियों के खिलाफ दस्तावेजी और अन्य साक्ष के आधार पर प्र्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपी भोपाल निवासी हैं, लेकिन कैश के्रडिट लिमिट इंदौर के बैंक से कर निजी कामों और जरुरतों पर खर्च कर दिया। दस्तावेजों में भी कूट रचना की गई है। अभी जांच हो रही है, जल्द ही चालानी कार्रवाई होगी।

-अरुण मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ

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