भोपाल. विधानसभा सत्र के पांचवें दिन मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आज इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में स्थगन प्रस्ताव को लेकर बोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए और सरकार को आड़े हाथों लिया।

1. सरकार की कोशिश सदन में भागीरथपुरा पर चर्चा न हो
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भागीरथपुरा में गलती किसकी है, क्या हुआ और क्या नहीं हुआ, इस पर चर्चा नहीं हो रही है। बल्कि सत्ता पक्ष पूरा प्रयास कर रहा है कि इस गंभीर मामले पर सदन में चर्चा ही न हो। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने सदस्य खोए हैं, उनसे पूछा जाए कि वे चर्चा चाहते हैं या नहीं। यदि वे मना कर दें, तो हम भी चर्चा नहीं करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने नियम 55 का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन हो, तब भी उस पर चर्चा कराई जा सकती है।
नेता प्रतिपक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि मंत्री ने सिस्टम की गलती स्वीकार की है कि टेंडर में देरी हुई। उन्होंने कहा कि अमृत योजना के तहत तीन वर्षों में 3256 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन अभी तक इंदौर के लिए एक भी रुपए खर्च नहीं हुआ, जबकि 27 करोड़ रुपये ठेकेदार को एडवांस दे दिए गए।
2. घोटालों पर जवाब नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी की ओर से सज्जन वर्मा जी और महेश परमार को भेजा गया था। हम झगड़ा करने नहीं, उन परिवारों का दुख-दर्द जानने और संवेदना प्रकट करने गए थे। इसमें कौन सी राजनीति है?
उन्होंने कहा कि इंदौर से उनका भी गहरा नाता है, लेकिन जब शहर में हो रहे घोटालों पर सवाल उठाए जाते हैं, तो जवाब नहीं मिलता।
उमंग सिंघार ने आरटीआई के माध्यम से नगर निगम से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि कागजों पर एक रात में 5 किलोमीटर सीवेज लाइन डाल दी जाती है और डेढ़ सौ करोड़ रुपये फर्जी बिल के नाम पर लगा दिए जाते हैं। इस मामले पर मीडिया ने भी सवाल उठाए और भागीरथपुरा मामले में हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए भी टिप्पणी की कि केवल आंकड़ों की कालबाजी चल रही है।
3. यह हादसा नहीं, भरोसे की मौत है
उमंग सिंघार ने कहा कि भागीरथपुरा की घटना एक हादसा नहीं, बल्कि उस भरोसे की मौत है जो लोग सरकार और प्रशासन पर करते हैं। लोगों ने नल खोला, पानी भरा, बच्चों और बुजुर्गों को दिया, और वही पानी उनकी मौत का कारण बन गया। उन्होंने अव्यान साहू नाम के बच्चे की मृत्यु का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी मौतों के बाद हम सामान्य जीवन कैसे जी सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सिस्टम की वजह से हत्याएं हो रही हैं, लेकिन बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती। कुछ दलित और आदिवासी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि अन्य को प्रमोशन दे दिया गया।
4. पानी की टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रोक?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पानी की टेस्ट रिपोर्ट पेश करने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से निर्देश दिए थे कि रिपोर्ट सार्वजनिक न की जाए। उन्होंने बताया कि खजराना की एक रिपोर्ट में खतरनाक और अनकाउंटेबल बैक्टीरिया पाए गए हैं। भूरी टेकरी में लगभग 2000 लोग सीवेज के बीच रहने को मजबूर हैं। वहां साफ पानी की व्यवस्था नहीं है और लोग बाल्टियों से पानी ऊपर ले जा रहे हैं। उनके दौरे के बाद नगर निगम ने 35 ट्रक कचरा हटाया।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 5 के वार्ड 53, विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 के बर्फानी धाम और कृष्ण बाग में भी पानी में बैक्टीरिया मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। उन्होंने पूछा कि क्या पूरे इंदौर को दूषित पानी पिलाया जा रहा है?
उन्होंने याद दिलाया कि 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए 60 में से 59 पानी के सैंपल दूषित पाए गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने याद दिलाया कि 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए 60 में से 59 पानी के सैंपल दूषित पाए गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
5. स्थगन स्वीकार न करना सरकार के लिए कलंक
उमंग सिंघार ने कहा कि यदि स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया तो यह सरकार के लिए कलंक की बात होगी। उन्होंने कहा कि पानी वाले पूरे मामले में सभी जिम्मेदारों पर बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया? केवल ट्रांसफर से जवाबदेही खत्म नहीं होती।
उन्होंने मौत के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि सरकार 20 मौतें बता रही है, जबकि 35 मौतें हो चुकी हैं। कुछ बाहरी लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि सभी जांच रिपोर्ट, कार्ययोजनाएं और एमओयू सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किए जाएं।
6. शिकायत हुई मगर सरकार नहीं जागी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वार्ड क्रमांक 11 की पार्षद बघेला ने एक वर्ष पूर्व पत्र लिखकर भागीरथपुरा में नर्मदा जल लाइन डालने की मांग की थी। इसके बावजूद सरकार नहीं जागी।
उन्होंने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री की कोई जवाबदेही नहीं बनती?
7. अन्य शहरों में भी गंभीर स्थिति
श्री सिंघार ने कहा कि इंदौर के साथ जबलपुर, ग्वालियर-चंबल और उज्जैन में भी ऐसी स्थिति की आशंका जताई जा रही है। उज्जैन हाई अलर्ट पर है और वहां की रिपोर्ट भी वे सदन में प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि सिहंस्थ में 13 हजार करोड़ रुपए का बजट दिया जा रहा है। क्या साधु-संतों को गंदे पानी में डुबकी लगवाने की तैयारी है? सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्री सिंघार ने कहा कि इंदौर के साथ जबलपुर, ग्वालियर-चंबल और उज्जैन में भी ऐसी स्थिति की आशंका जताई जा रही है। उज्जैन हाई अलर्ट पर है और वहां की रिपोर्ट भी वे सदन में प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि सिहंस्थ में 13 हजार करोड़ रुपए का बजट दिया जा रहा है। क्या साधु-संतों को गंदे पानी में डुबकी लगवाने की तैयारी है? सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।