- झारखंड के हजारीबाग अदालत में लंबित आपराधिक मामले का भी हो गया समापन
दिलली/ हजारीबाग (झारखंड) (Live Law)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पटकथा लेखक और निर्देशक सुजॉय घोष द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ कॉपीराइट एक्ट, 1957 की धारा 63 के तहत दर्ज आपराधिक मामले को निरस्त (Quash) कर दिया है। यह मामला इस आरोप पर आधारित था कि उनकी फिल्म कहानी 2: दुर्गा रानी सिंह कथित रूप से एक चोरी की गई स्क्रिप्ट पर आधारित है।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने झारखंड के हजारीबाग स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया।
यह विशेष अनुमति याचिका (SLP) झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जिसमें घोष की धारा 482 CrPC के तहत दायर याचिका को खारिज कर दिया गया था।

घोष का तर्क-दो साल पहले ही रजिस्टर्ड हो चुकी थी उनकी पटकथा
मामला उमेश प्रसाद मेहता द्वारा दायर शिकायत से उत्पन्न हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी स्क्रिप्ट सबक का उपयोग फिल्म कहानी-2 बनाने में किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने जून 2015 में अपनी स्क्रिप्ट घोष को सौंपी थी, ताकि वे उसे फिल्म निमार्ता संगठन में पंजीकरण के लिए अनुशंसा पत्र दिला सकें। उनका आरोप था कि दिसंबर 2016 में रिलीज हुई फिल्म में उनकी स्क्रिप्ट का उल्लंघन हुआ है। हालांकि, सुजॉय घोष ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने कहानी 2 की स्क्रिप्ट नवंबर 2012 में लिखनी शुरू कर दी थी और दिसंबर 2013 में स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन में इसका पंजीकरण भी करा लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी शिकायतकर्ता से कभी मुलाकात ही नहीं हुई और न ही उन्होंने कोई स्क्रिप्ट प्राप्त की।

घटनास्थल और क्षेत्राधिकार को सही नहीं माना सुप्रीमकोर्ट ने
ज्ञात हो कि हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कार्यवाही निरस्त करने से इनकार कर दिया था कि तथ्यों का निर्धारण ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में घोष ने तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट ने बिना किसी प्रारंभिक जांच या दोनों स्क्रिप्ट्स की तुलना किए ही समन जारी कर दिया, जो कानून के स्थापित सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि यह शिकायत निराधार और उत्पीड़न का माध्यम है, खासकर तब, जब उनकी स्क्रिप्ट का पंजीकरण शिकायतकर्ता की स्क्रिप्ट से दो वर्ष पहले हो चुका था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने क्षेत्राधिकार (territorial jurisdiction) का मुद्दा भी उठाया, यह कहते हुए कि कथित घटना पूरी तरह मुंबई में हुई थी, इसलिए हजारीबाग में मामला चलाना उचित नहीं था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।