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बुरहानपुर जिला अस्पताल के लिए 26 लाख रुपए की खरीदी में भंडार क्रय नियमों की धज्जियां उड़ने का खुलासा, गुपचुप बदला जा रहा सामान

  • क्रिटिकल केयर यूनिट में सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र वर्मा द्वारा उपकरण खरीदी में किए गए 26 लाख के भ्रष्टाचार में लीपापोती के खिलाफ कांंग्रेस ने दिया आंदोलन का अल्टीमेटम

बुरहानपुर।
बुरहानपुर जिला अस्पताल में 26 लाख का भ्रष्टाचार दिसंबर 2025 में खुलने के बाद अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले की शिकायत करने के बाद भी अफसर मामले को रफा दफा करने में जुटा है। यही कारण है कि पिछले दो दिन से अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट में आई घटिया सामग्री को गुपचुप बदलने का काम चल रहा है।
 




यह गंभीर आरोप कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रदेश महासचिव अजय रघुवंशी ने लगाते हुए खुलासा किया है कि जिला अस्पताल के पास बने क्रिटिकल केयर यूनिट के उपकरण खरीदी के लिए मिली राशि में सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र वर्मा ने वित्तीय अनियमितताएं की हैं। रघुवंशी के अनुसार बाजार में जिन उपकरण की कीमतें कम है, उन्हें अधिक भाव में खरीदकर बिल जारी कर दिया गया। वहीं 23 दिसंबर 2025 को ये मामला मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद भी अब तक इस पर कार्रवाई न होना समझ से परे हैं। यहां भोपाल तक के स्वास्थ्य अधिकारी इसमें मिलीभगत कर मामले को निपटाने में लगे हैं।


जांच दल ने कहा- भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया

घटिया सामग्री के लिए आए जांच दल ने इस पर अभिमत भी दिया है। जांच दल में उपसंचालक एवं जांचकर्ता अधिकारी इंदौर संभाग डॉ. सोनिया शिल्पा लाल, देवेंद्र देवाश्री लेखाधिकारी इंदौर संभाग, वासदेव नाथानी लेखापाल सवास्थ्य सेवा इंदौर संभाग, शोभाराम चौहान स्टेनोग्राफर स्वास्थ्य सेवा इंदौर संभाग, दिलीप पटेल फार्मासिस्ट ग्रेड-2 मुख्य अस्पताल अधीक्षक धार ने जांच की। जांच रिपोर्ट में साक्ष्य कथनों एवं अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा क्रय की गई सामग्री में मप्र भंडार क्रय नियमों के बिंदु क्रमांक 10 एवं अन्य बिंदुओं का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया न ही निविदा की शर्तें तैयार कर क्रय समिति से अनुमोदन लिया गया, न ही सामग्री के आंवंटित बजट के स्पेशीफिकेशन का निर्धारण किया गया और न ही जेम पोर्टल पर अपलोड किया गया। हद तो यह कि तकनीकी निविदा की प्रोसेडिंग एवं दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। सामग्री की गुणवत्ता के अनुरूप प्राप्त किए जाने के पूर्व सभी पहुलओं पर प्रक्रिया अनुसार परीक्षण किया जाना था, किंतु सप्लाय सामग्री डब्बाबंद एवं पैकिंग में होने के कारण खोलकर अथावा क्रय आदेश अनुरूप स्पेशीफिकेशन अनुसार क्वालिटी का परीक्षण स्टोरकीपर एवं सीएमएचओ द्वारा नहीं किया गया। अत: प्रथम दृष्टया सत्यापनकर्ता अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेंद्र वर्मा एवं स्टोरकीपर कलीराम पालवी की संदिग्ध भूमिका परिलक्षित होना पाया गया तथा दोनों संस्थाओं में आपसी समन्वय एवं सामंजस्य न होने की स्थिति में यह स्थिति निर्मित हुई।


उपसंचालक ने क्षेत्रीय संचालक को लिखा पत्र, मांगा ब्यौरा

सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में उपसंचालक संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मप्र ने क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं इंदौर संभाग को पत्र लिखा है। यह पत्र 12 मार्च 2026 को जारी किया। इसमें सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र वर्मा के विरुद्ध की गई शिकायत का ब्योरा मांगा गया है। जिसमें मुख्य रूप से कितनी राशि की सामग्री आई। कितनी राशि का अपव्यय हुआ। शासन को कितनी राशि का नुकसान हुआ। डॉ. राजेंद्र वर्मा का शासकीय सेवा से सेवा निवृत्त दिनांक क्या है। इस संबंध में जानकारी अपने स्पष्ट अभिमत सहित तत्काल उपब्ध कराने के आदेश दिए।


क्षेत्रीय संचालक जोसफ के जांच के तौर-तरीके घेरे में

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार उजागर होने के बावजूद क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवा डॉ. शाजी जोसफ द्वारा वापस जांच टीम बुरहानपुर जिला अस्पताल में भेजी गई है, जो इस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। यहां पर सामान बदलने का काम चल रहा है। ऐसे में पूरा मामला रफा दफा होने की संभावना है।



सीएमएचओ को हटाकर कार्रवाई नहीं की गई तो उग्र आंदोलन

डॉ. राजेंद्र वर्मा सीएमएचओ बुरहानपुर पर कार्यवाही नहीं हुई और तत्काल नहीं हटाया गया तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेंगी। श्री रघुवंशी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के सुशासन पर भी प्रश्न चिन्ह लगया आपने कहा कि बस आपकी बातों में ही ईमानदारी झलकती है,बाकी तो के काम तो आपके स्थानीय विधायक, सांसद की भ्रष्टाचार पर चुप्पी आपकी ईमानदारी और सुशासन की पोल खोल रही है।

-अजय रघुवंशी,
पूर्व महासचिव, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी