- मानसिक प्रताड़ना से परेशान युवक सल्फास खाने के बाद भर्ती कराया गया था, लेकिन बिना समुचित परीक्षण मृत घोषित करके पीएम के लिए भेज दिया गया था
गुना। यह देश का बिरला मामला होगा कि, जिसे मृत मानकर पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भेज दिया गया हो, उसको वहां होश आ गया और उसके बाद उसने नंग-धड़ंग ही जान बचाने दौड़ लगा दी हो। यह वाकया मध्यप्रदेश के गुना जिला अस्पताल का है।

दरअसल गुना जिला अस्पताल के डॉक्टरों की घोर लापरवाही के चलते एक 20 वर्षीय जीवित युवक को मृत घोषित कर दिया गया और उसे चीर-फाड़ के लिए मचुर्री (मुर्दाघर) भेज दिया गया। जहां एसी रूम में नियमानुसार उसके कपडेÞ उतार कर टेबिल पर लिटा दिया गया। आरोप हैं कि इसी दौरान मृत घोषित युवक को मचुर्री की ठंडी मेज पर अचानक होश आ गया और वह खुद को नग्न अवस्था में पाकर जान बचाने के लिए वहां से बाहर की ओर भागा। अस्पताल परिसर में एक कथित मुर्दे को नंग-धड़ंग हालत में भागते देख मरीजों और स्टाफ के बीच हडकंप मच गया और लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे।
11 मार्च को सल्फास खाने के बाद भर्ती कराया था जॉन पारदी को
इस बारे में सामने आया है कि गुना के हड्डी मील क्षेत्र के निवासी जॉन पारदी ने मानसिक प्रताडना से तंग आकर बीते 11 मार्च को जहरीले पदार्थ सल्फास का सेवन कर लिया था। इसके बाद अचेत अवस्था में परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहाँ ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने बिना किसी गहन परीक्षण या ईसीजी (श्वष्टत्र) किए उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में कागजी औपचारिकताएं पूरी कीं और शव को पोस्टमार्टम के लिए मचुर्री हाउस भिजवा दिया।
ठंड के कारण होश आया तो मुर्दों के बीच नंगा पड़ा हुआ था
मृत घोषित होने के बाद जिंदा होकर नंगा भाग निकलने वाले जॉन पारदी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि जब उसे होश आया, तो वह एक ठंडी मेज पर पूरी तरह नग्न अवस्था में लेटा हुआ था। चारों ओर लाशों की दुर्गंध और सन्नाटा देख उसे तुरंत आभास हुआ कि वह मुर्दाघर के भीतर है और डॉक्टर उसे मृत समझकर उसका पोस्टमार्टम करने वाले हैं। तब मौत के खौफ से डरा युवक उसी नंगी अवस्था में मचुर्री से बाहर की ओर भागा, जिसे देख अस्पताल में मौजूद लोगों की रूह कांप गई। मुर्दाघर से नंगे निकले युवक को देख चीख पुकार मच गई। हालांकि तब तक उसके परिजन भी वहां पहुंच गए और उन्होंने कपडेÞ पहनाकर किसी तरह उसे संभाला। पीड़ित युवक ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि उसे समय पर होश नहीं आता, तो शायद डॉक्टर उसे जीवित अवस्था में ही चीर देते, जिससे उसकी तड़प-तड़प कर जान चली जाती।

जिला अस्पताल की जांच प्रक्रिय और डॉक्टरों की संवेदनशीलता घेरे में
इस अजीबोगरीब मामले ने गुना जिला अस्पताल की जांच प्रक्रिया और डॉक्टरों की संवेदनशीलता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वर्तमान में यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोग लापरवाह चिकित्सकों के विरुद्ध हत्या के प्रयास जैसी सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन इस मामले ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर गहरा बट्टा लगा दिया है। हालांकि अस्पताल की ओर से सीएमएचओ ने आरोपों को गलत बताते सारे घटनाक्रम को नकार दिया है।
जहर खाने के बाद भर्ती तो हुआ था, लेकिन पीएम के लिए नहीं भेजा
युवके आरोप निराधार हैं, अगर उसके पास कोई दस्तावेज हैं पीएम के लिए भेजे जाने के और सबूत हैं तो पेश करे। उसको जहर खाने के बाद भर्ती ्रकिया गया था, लेकिन पीएम के लिए नहीं भेजा गया। इस तरह की प्रक्रिया का पालन नही किया गया, यानि उसको मृत घोषित करके पीएम के लिए नहीं भेजा गया था। यह आरोप छवि खराब करने के लिए लगाए जा रहे हैं।
-डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला गुना