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गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए: भोपाल में मुस्लिम समाज उतरा सड़क पर और गो हत्यारों के ठिकानों पर बुलडोजर चलाने की मांग

  • आल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने गोमांस मामले में सिर्फ असलम चमढ़ा को मुजरिम बनाने और पशु चिकित्सक, नगर निगम के कर्मचारियों, अधिकारियों को बख्शने का लगाया संगीन आरोप

भोपाल।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गोमांस के काले कारोबार में शामिल आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग करते राजधानी भोपाल की सड़क पर मुस्लिम समाज उतर आया। मुस्लिमों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के स्लोगन लिखे बड़े-बड़े कट-आउट लहराकर नारेबाजी की।




राजधानी भोपाल के इतवारा इलाके में प्रदर्शनकारी मुस्लिमों की अगुवाई कर रहे आल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के सरंक्षक शमसुल हसन बल्ली ने इस मौके पर साफ कहा कि प्रदेश में गौमाता के साथ हो रहे अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने तक मुस्लिम समाज का आंदोलन जारी रहेगा।                                                                                                                                        

गोकशी के मामलों में सख्त कार्रवाई की जरुरत

आल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के सरंक्षक शमसुल हसन बल्ली ने कहा कि बीते दिनों गोमांस से भरा ट्रक पकड़ा गया था। इस मामले में सिर्फ असलम चमड़ा को आरोपी बनाया गया है, जबकि इस काले कारोबार में नगर निगम के संबंधित कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। साथ ही निगम का पशु चिकित्सक भी सर्टिफाइड करता रहा है। बावजूद इनको आरोपी नहीं बनाया गया है, जिससे अवाम में गहरी नाराजगी है। मुस्लिमों की मांग है कि सारे आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट होनी चाहिए।


गोकशी रोकने के लिए बुलडोजर चलाया जाए

मुस्लिमों ने प्रदेश सरकार से अपील करते हुए कहा है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए। साथ ही गोकशी रोकने के लिए दोषियों के दुकानों और मकानों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। स्थानीय लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, वहीं प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इस अवसर पर अदनान हसन, जाहिद पठान, आरिफ खान, भूरा भाई, अत्ताउल्लाह, इकबाल, जमशेद आलम, फैजान उल हक, परवेज कुरैशी सहित सैकड़ों की तादाद में मुस्लिम समाज के नुमाइंदे थे।