- बढ़ रही हैं कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए बौद्धिक संपदा और व्यवसायीकरण की चुनौतियां
भोपाल। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल ने 30 अप्रैल को निदेशक समिति हॉल में 'विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026' मनाया। इसका आयोजन बेहद सुनियोजित रूप से किया गया था, जिसमें कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए बौद्धिक संपदा के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

बौद्धिक संपदा के लिए जागरुकता बढ़ाने की जरुरत
इसकी शुरूआत डॉ. सुबीर कुमार चक्रवर्ती के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व और नवाचार तथा व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी। संस्थान के निदेशक और कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. सीआर मेहता ने एक सारगर्भित भाषण दिया, जिसमें उन्होंने 1976 से अब तक बौद्धिक संपदा संरक्षण के क्षेत्र में संस्थान की यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बौद्धिक संपदा (कढ) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नवाचारों को सुरक्षित रखने में संस्थान के वैज्ञानिकों के समर्पित प्रयासों पर जोर दिया, और इस बात को रेखांकित किया कि संस्थान नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नवाचार करने वालों की मदद के लिए सरकारी योजनाएं
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीलेश त्रिवेदी (सहायक निदेशक, ग्रेड-क, एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, इंदौर) ने अपने संबोधन में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, भौगोलिक संकेतक (ॠक) और डिजाइन पंजीकरण जैसे विषयों को शामिल किया। उन्होंने बौद्धिक संपदा संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं, इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों, विवादों के समाधान की रणनीतियों और नवाचार करने वालों तथा उद्यमियों को सहयोग देने वाली सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। श्री त्रिवेदी ने आविष्कारकों के अधिकारों की रक्षा करने और व्यावसायीकरण के प्रयासों में सहायता प्रदान करने के लिए 'बौद्धिक संपदा सुविधा केंद्रों' (कढऋउ) तथा 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा केंद्रों' (ळळऋउ) के महत्व पर भी विशेष जोर दिया।
वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तकनीकी कर्मचारियों ने लिया भाग
कार्यक्रम का समापन डॉ. वी. भूषणा बाबू (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी) द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, डॉ. सीआर मेहता, आयोजकों और कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों के बहुमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, तकनीकी कर्मचारियों और युवा पेशेवरों ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया, जो कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में नवाचार और बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने की उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के मीडिया प्रभारी, डॉ मनोज त्रिपाठी,प्रधान वैज्ञानिक ने रिसर्च में इसकी महत्व को राखांकित किया । इस कार्यक्रम में डॉ एस पी सिंह,डॉ करन सिंह, डॉ.सी के सहाय, डॉ गंगील, डॉ सी.डी सिंह एवं संस्थान के कई वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।

नवाचार करने वालों को शिक्षित, सशक्त बनाने का प्रेरक मंच
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल में आयोजित 'विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026' ने नवाचार करने वालों को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए एक प्रेरक मंच के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में प्रगति और व्यावसायीकरण को गति प्रदान करने में बौद्धिक संपदा की महत्वपूर्ण भूमिका को भी पुन: स्थापित किया।

नवाचार करने वालों को शिक्षित, सशक्त बनाने का प्रेरक मंच
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल में आयोजित 'विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026' ने नवाचार करने वालों को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए एक प्रेरक मंच के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में प्रगति और व्यावसायीकरण को गति प्रदान करने में बौद्धिक संपदा की महत्वपूर्ण भूमिका को भी पुन: स्थापित किया।