ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चे के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव एवं महामंत्री दिनेश सिसोदिया के मुताबिक सरकार का यह कदम नई बोतल में पुरानी शराब परोसने और खोदा पहाड़ निकली चुहिया कहावत को चरितार्थ करने जैसा है। जबकि गत विधानसभा चुनाव वर्ष 2023 में भाजपा के वचन पत्र क्रमांक-81 में म.प्र. के आउटसोर्स कर्मियों को केन्द्र के आउटसोर्स कर्मियों के समान न्यूनतम वेतन देने और उन्हें संविदा कर्मी का दर्जा देने का वादा किया गया था, जो इस पोर्टल में पूरा करते नहीं दिखाया गया है।
पहले और अब में कोई अन्तर नहीं: भार्गव का मत है कि पहले सभी विभाग अपने-अपने पोर्टल पर आउटसोर्स अनुबंध व वर्क आर्डर की प्रविष्टि किया करते थे पर अब नये पोर्टल से आर.ओ.एम.एस. पोर्टल पर इन्ट्री होगी पर इससे आउटसोर्स कर्मियों को विशेष राहत नहीं मिलेगी। पहले भी प्रिंसीपल नियोक्ता सरकारी सेक्टर था, अब भी नई व्यवस्था में ई.एस.आई. व पी.एफ. आदि जमा करने की जिम्मेवारी शा. एजेंसी की रहेगी, यानि ठेका प्रथा में मूल परिवर्ततन व बड़ा बदलाव पोर्टल बनाने से नहीं हुआ, बल्कि इससे ठेकेदारी प्रथा पर सरकार की डटे रहने की मंशा प्रकट होती है।
ठेकेदार पर क्या एक्शन लेंगे, पोर्टल में जिक्र नहीं: भार्गव ने हैरानी ज़ाहिर की कि वित्त विभाग के नये आर.ओ.एम.एस. पोर्टल में इस बात का कोई उल्लेख ही नहीं है कि यदि मानव बल काॅन्ट्रेक्टर ठेकेदार समय पर वेतन व एरियर्स नहीं देता व ई.पी.एफ. और ई.एस.आई. सी. की राशि संबंधित ठेकाकर्मी के खाते में समय पर जमा नहीं करता या वेतन हड़पता है तो सरकार कितने दिनों में क्या कदम उठायेगी? जिन ठेका श्रमिकों का कई वर्ष पहले वेतन, एरियर, ई.पी.एफ. व ई.एस.आई.सी. राशि ठेकेदार हड़प चुका है उसे सरकार पोर्टल के जरिए कब तक वापस दिलायेगी और लंबी प्रक्रिया के स्थान पर 24 घंटे में ठेकेदार को सरकार कैसे ब्लेक लिस्ट करेगी, और जिन्हें पहले ब्लैकलिस्ट किया गया, वह दूसरे नामों से ठेका ना ले पायें, उन्हें कैसे रोकेगी, ये भी इस पोर्टल में दर्शित नहीं है।
