- ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने की प्रधानमंत्री से जांच की मांग करते लगाए 600 करोड़ गबन के आरोप
भोपाल। मक्का और मदीना स्थित भोपाल रुबात संपत्तियों को लेकर चल रहा विवाद अब और अधिक गंभीर रूप लेता जा रहा है। जहां एक ओर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मुताव्वली सबा अली खान पटौदी और सिकंदर हाफिज पर गंभीर आरोप लगाए थे, वहीं अब ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी भी इस मामले में खुलकर सामने आ गई है।

कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने प्रेस वार्ता में बड़ा दावा करते हुए कहा कि मक्का-मदीना रुबात मामले में लगभग 600 करोड़ रुपये के गबन की आशंका है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भोपाल रुबात के संचालन में एक पाकिस्तानी नागरिक अहमद शहजाद को केयरटेकर बनाया गया, जो राष्ट्रीय सम्मान और सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।
शमशुल हसन ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
वक्फ बोर्ड और अन्य पक्षों पर भी उठे सवाल
कमेटी ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उन्हें रुबात के संचालन की जानकारी थी, तो उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को इसकी सूचना क्यों नहीं दी। इस बिंदु की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
शमशुल हसन ने कहा कि जिन लोगों के नाम इस मामले में सामने आ रहे हैं, उनकी कॉल डिटेल और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जानी चाहिए। उनका दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज
मामले में राजनीतिक रंग भी गहराता दिख रहा है। शमशुल हसन ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देर रात बयान रिकॉर्ड कर वायरल करना गंभीर संवेदनशील मामले को राजनीतिक दिशा देने जैसा प्रतीत होता है।
दूसरी ओर, सिकंदर हाफिज ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि उन्हें जानबूझकर विवाद में घसीटा जा रहा है।
जांच की मांग तेज, विवाद बढ़ने के संकेत
मक्का-मदीना रुबात प्रकरण अब धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन चुका है। लगातार नए आरोपों और बयानों के बीच यह स्पष्ट है कि मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस गंभीर प्रकरण में क्या कदम उठाती हैं, और क्या वास्तव में व्यापक जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाएगी।