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18 सामुदायिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी हाथों में सौंपना गरीब जनता से बची खुशी स्वास्थ्य सुविधाओं को छीनना है : माकपा

भोपाल | भाजपा की प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार मंत्रिमंडल द्वारा प्रदेश के तीन जिलों गुना, रीवा और देवास के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी हाथों के बहाने स्वास्थ्य माफियाओं को सौंप कर स्वास्थ्य सेवाओं को महंगा करने और आम स्वास्थ्य सुविधाओं को आम और गरीब नागरिकों से छीन कर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने की साजिश का हिस्सा है l



मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार सर्वे 6 के जारी होने से प्रदेश की बीमारी स्थिति उजागर हुई है l इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश के 39.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं l चिंता की बात यह है कि इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच सालों में बालिग पुरुषों में कुपोषण 20.8 फीसद से बढ़कर 28.3 प्रतिशत हो गया है l इसी दौरान बालिग महिलाओं में कुपोषण 23 फीसद से 26.5 फीसद तक पहुंच गया है l



माकपा नेता ने कहा है कि यह रिपोर्ट बताती है कि बीमारियों, मधुमेह और हृदय रोग संबंधी बीमारियों के कारण महिलाओं में मोटापे की समस्या 16.6 प्रतिशत से 22.2 प्रतिशत और पुरुषों में 15.6 से 17.6 प्रतिशत हो गयी है l इन बीमारियों से निपटने और प्रदेश के नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है, लेकिन सरकार बची खुची सुविधाओं को भी गरीबों से छीन कर स्वास्थ्य माफियाओं के हवाले करने जा रही है l

जसविंदर सिंह ने कहा है कि इस रिपोर्ट ने भाजपा सरकार के दावों को बेनकाब करते हुए बताया है कि प्रदेश के 327 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों के स्वीकृत 1320 पदों में से 1207 पद खाली पड़े हुए हैं l जो कुल पदों के 91 प्रतिशत से भी अधिक है l इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की इस बदहाली के कारण जिन बीमारियों का उपचार वहां सम्भव हो सकता था उन्हें भी जिला अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है l जिस कारण मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है क्योंकि कई गांवों से जिला अस्पताल 100 से 200 किलोमीटर की दूरी पर है l

माकपा नेता ने कहा है कि राज्य सरकार को स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार और उसे समुचित डॉक्टरों और अन्य उपकरणों से संपन्न करने की बजाय सरकार गरीबों से स्वास्थ्य सुविधाएं छीन कर उनके जीवन की ही दुश्मन हो गयी है l

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सरकार को इस निजीकरण के निर्णय को वापस लेने और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रिक्त पदों को भरने की मांग की है I