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समकालीन नृत्य और लाइव संगीत के अद्भुत संगम ने रचा सांस्कृतिक संवाद

  • साइप्रस की सेलास डांस कंपनी द्वारा दी गयी जनजातीय संग्रहालय में प्रस्तुति
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा जनजातीय संग्रहालय, भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संध्या में साइप्रस की प्रतिष्ठित समकालीन नृत्य संस्था सेलास डांस कंपनी की विशेष नृत्य एवं संगीत प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। समकालीन नृत्य, जीवंत संगीत और दृश्यात्मक अभिव्यक्ति के अद्भुत समन्वय ने उपस्थित कला प्रेमियों को एक विशिष्ट सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया। कार्यक्रम प्रारंभ होने से पूर्व वीर भारत न्‍यास की ओर से राहुल रस्‍तोगी द्वारा पुष्‍पगुच्‍छ भेंट कर कलाकारों का स्‍वागत किया गया।
 


वर्ष 2005 में स्थापित सेलास डांस कंपनी का उद्देश्य मूवमेंट आर्ट को एक सजीव कलात्मक साधना के रूप में विकसित करना, अन्य कला विधाओं के साथ उसका संवाद स्थापित करना तथा समकालीन कला की विविधता को रेखांकित करना है। संस्था संगीत और मानव गति के बीच संबंध तथा उनके रचनात्मक समागम का गहन अध्ययन करती है।

50 मिनट की प्रस्तुति के दौरान दो स्वतंत्र नृत्य कृतियों को एक सतत कलात्मक प्रवाह में प्रस्तुत किया गया। कोरियोग्राफर एवं शिक्षाविद् मारिया काम्बेरिस के निर्देशन में कलाकारों ने मानव स्मृतियों, सांस्कृतिक परिदृश्यों और मानवीय अनुभवों को नृत्य के माध्यम से सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की। प्रस्तुति ने प्राचीन भूमध्यसागरीय सांस्कृतिक विरासत और समकालीन कलात्मक चिंतन के मध्य एक प्रभावशाली सेतु निर्मित किया।

सेलास डांस कंपनी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यूरोप, भारत, जॉर्डन और अफ्रीका के विभिन्न देशों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है। संस्था की प्रस्तुतियाँ यूरोप के डांसिंग रूट्स कोमोटिनी, ग्रीन कॉरिडोर ब्रुसेल्स और एसीई डांस एंड म्यूजिक बर्मिंघम जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शित की जा चुकी हैं।
 


प्रस्तुति के संगीतकार डेमेट्रिस यियासेमाइड्स द्वारा रचित और मंच पर सजीव रूप से प्रस्तुत संगीत इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। इलेक्ट्रॉनिक संगीत, बांसुरी तथा अन्य वायु वाद्यों की ध्वनियों ने नृत्य के साथ ऐसा समन्वय स्थापित किया कि संगीत केवल संगत न रहकर प्रस्तुति का अभिन्न अंग बन गया। संगीत और नृत्य के इस संवाद ने दर्शकों को एक गहन भावनात्मक और सौंदर्यात्मक अनुभव प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहपूर्ण तालियों से स्वागत किया। यह आयोजन भारत और साइप्रस के मध्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा वैश्विक कलात्मक संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।