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मध्यप्रदेश में पहली बार...जेल में मनाई गई अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती

  • मध्यप्रदेश की केंद्रीय जेल नरसिंहपुर मेें कैदी की बनाई शहीद प्रतिमा बनी प्रेरणास्त्रोत, कैदियों ने पेश किए सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम


नरसिंहपुर। देशभर की जेलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है, लेकिन मध्यप्रदेश में पहली बार किसी जेल में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जंयती धूमधाम से मनाई गई, जिसकी प्रेरणा जेल परिसर में ही एक कैदी द्वारा बनाई गई आजाद की प्रतिमा से मिली। ज्ञात हो कि नरसिंहपुर सेंट्रल जेल के अलावा सिर्फ इंदौर सेंट्रल जेल में ही आजाद की प्रतिमा स्थापित है, जहां माल्यार्पण किया जाता है।
 

दरअसल सेंट्रल जेल नरसिंहपुर में आजाद जयंती पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कैदियों ने जेल स्टाफ के सहयोग से तैयार किए गए गायन और लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इनमें आजाद के जीवन और आजादी के लिए किए गए संघर्ष को याद किया गया। 
बंदियों ने पूरे उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम में भाग लिया। ऐसे कार्यक्रम बंदियों में सकारात्मक सोच, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रप्रेम की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


जेल प्रशासन द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों में आत्मविश्वास का विकास करना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ने की दिशा में प्रेरित करना रहा।
इस दौरान जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी पाण्डेय, उप जेल अधीक्षक नरेन्द्र कुमार व्यास, सहायक जेल अधीक्षक एडवर्ड स्वामी, आशीष कुमार खरे, देवेन्द्र मांझी, श्रीमती शिल्पा छत्तर सहित जेल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


इस तरह आजाद जयंती का आया ख्याल

सेंट्रल जेल अधीक्षक, नरसिंहपुर अदिति चतुर्वेदी पाण्डेय के अनुसार बीते साल आजाद जयंती मनाने के लिए युवाओं की टीम सड़क पर जनसहयोग और चंदा मांग रही थी, लेकिन अधिकतर की इसमें रुचि नही थी। युृवाओं का जोश और उनकी मंशा का आदर करते हुए पहली बार आर्थिक सहयोग किया। तब ही जेल में भी आजाद जयंती मनाने का विचार आया। अदिति चतुर्वेदी के अनुसार कैदियों को आजादी के इतिहास से परिचित कराने के साथ ही हमारे नायकों के जीवन से प्रेरणा लेकर अच्छा काम करने के लिए आजाद जयंती मनाई गई। इसमें कैदियों की सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शन के साथ ही आपस में भी इंटरेक्शन हुआ।


अच्छी शुरुआत, इससे कैदियों के जीवन में आएगा बदलाव

देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले शहीदों के बारे में बताना और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का ध्येय होता है। ऐसे में आजाद जयंती मनाना और कैदियों को अमर शहीद के बारे में जानकारी देना सराहनीय है। इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन से कैदियों के सोचने में सकारात्मक बदलाव आता है और आगे के जीवन के लिए बेहतर इंसान बन पाते हैं।

-संजय पाडेण्य, महानिरीक्षक, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, मध्यप्रदेश