- ‘शो योर टैलेंट’ पहल के तहत आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम का आरंभ सुबह लगभग 11:30 बजे हुआ। सबसे पहले बाल कलाकारों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों से माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया। कीर्ति, सान्वी, आरोही, काव्या, सृष्टि, देवांश और आराध्या सहित अन्य कलाकारों ने लोकप्रिय फिल्मी गीतों पर शानदार नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

इसके बाद काव्य-पाठ का क्रम शुरू हुआ। प्रीति मौर्य ने महिला स्वतंत्रता पर आधारित अपनी कविता ‘इतनी बेचैन क्यों हो’, अनुराग मिश्रा ने ‘कहां चल दिए’ तथा संध्या ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना से प्रेरित ‘एक बार तो कहकर देखा होता’ का प्रभावशाली पाठ किया। गौरी मिश्रा की कविता ‘कोख की पुकार’ को भी श्रोताओं ने विशेष सराहना दी।काव्य-पाठ के बाद कठपुतली कलाकार हर्ष निषाद ने पुराने और नए फिल्मी अभिनेताओं और लोकप्रिय कार्टून पात्रों के आवाजों की मिमिक्री प्रस्तुत कर दर्शकों को खूब गुदगुदाया।

इसके बाद संगीत प्रस्तुतियों का दौर आरंभ हुआ। विभिन्न आयु वर्ग के कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज से पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि अधिकांश प्रस्तुतियां युगल गायन के रूप में थीं। शैलेंद्र एवं बेबी शर्मा ने ‘जानेजां ढूंढता फिर रहा’, अंकित एवं साक्षी ने ‘जब कोई बात बिगड़ जाए’, अमित बाजपेयी एवं दिव्या ने ‘तेरी मोहब्बत में’, अर्चना एवं आरती ने ‘बड़ी मुश्किल बाबा बड़ी मुश्किल’, राहुल ने ‘मुसाफिर हूं यारों’ और लक्ष्मी प्रसाद ने ‘रिमझिम के गीत सावन गाए’ जैसे सदाबहार गीत प्रस्तुत किए, जिन्हें श्रोताओं ने भरपूर सराहा। बाल कलाकारों में अवंतिका ने ‘आरंभ है प्रचंड’ और रेयांश ने ‘है अपना दिल तो आवारा’ की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। वहीं नन्हीं अनाया ने संत कबीरदास के दोहों का मधुर गायन कर सभी का मन मोह लिया।

उल्लेखनीय है कि कानपुर मेट्रो ने नवोदित एवं स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए ‘शो योर टैलेंट’ नामक पहल की शुरुआत की है। कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कानपुर मेट्रो न केवल यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध करा रहा है, बल्कि साहित्य, संस्कृति और कला को प्रोत्साहित करने वाले एक सशक्त मंच के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।