स्वर संगीत एवं स्वास्थ्य सेवा समिति के सुरीली आवाज के धनी गायक पवन दुबे ने रफी साहब का जब दर्द भरा गीत आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे ओ मेरे मितवा सुनकर श्रोताओं आंखें नम हो गई , डॉ . जितेन्द्र सिंह तोमर ने अपने शानदार आवाज में रफी साहब का जब यह गीत तुम मुझे यूं भुला न पाओगे सुनाया और फिर ये चांद सा रोशन चेहरा, ज़ुल्फ़ों का रंग सुनहरा ये झील सी नीली आँखें, कोई राज़ है इनमें गहरा तारीफ़ करूँ क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया यह गीत सुनकर दर्शक तालियां बजाने के लिए मजबूर हो गए और खुशियों से झूम उठे।
पूर्व सैनिक मनमोहन सिंह तोमर ने बदन पे सितारे लपेटे हुए ओ जाने तमन्ना किधर जा रही हो जब यह गीत सुनाया तो दर्शकों को शम्मी कपूर की अदाएं याद आ गई और सभी झूम उठे, नगर की युवा तरुणाई सुनील सोनी ने एक दर्द भरा नगमा " वो जब याद आए बहुत याद आए"नगर की शानदार आवाज के धनी निलेश मिश्रा ने
मुझे इश्क है तुझी से,
मेरी जान ए ज़िन्दगानी
तेरे पास मेरा दिल है
मेरे प्यार की निशानी गीत सुनकर श्रोताओं ने सराहना की।
गीत संगीत का कार्यक्रम देर रात तक चला और कार्यक्रम का आभार व्यक्त सुनील सोनी ने किया।