- फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (एफएमपीसीसीआई ) के प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला से की मुलाकात
बैठक में एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक विशाल चौहान भी उपस्थित रहे तथा प्रतिनिधिमंडल के साथ औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष जयदेव ताम्रकार, सी. बी. मालपानी, अशोक आनंद, राजीव जैन, सचिव प्रवीण आचार्य, सहसचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह एवं मार्केटिंग हेड राजेश हिरवे शामिल रहे।
फेडरेशन के अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि प्रदेश का उद्योग एवं व्यापार जगत सरकार से किसी विशेष सुविधा की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक नियम एवं प्रक्रियाएं चाहता है। नियमों का सरलीकरण होने से उद्यमी अपना अधिक समय उत्पादन, निवेश, रोजगार सृजन, नवाचार एवं बाजार विस्तार में लगा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा का दौर है। प्रदेश के उद्योगों को देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा करनी है। इसके लिए कम से कम प्रक्रियात्मक बाधाएं, त्वरित अनुमतियां और बेहतर कारोबारी वातावरण अत्यंत आवश्यक हैं। फेडरेशन इसी उद्देश्य से शासन और उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद का माध्यम बनकर कार्य कर रहा है।
संपत्ति कर के दोहरे भार से राहत की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने औद्योगिक क्षेत्रों में संपत्ति कर के दोहरे भार का विषय प्रमुखता से उठाया। फेडरेशन ने सुझाव दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों में लिए जाने वाले संधारण शुल्क और नगर निकायों द्वारा लगाए जाने वाले संपत्ति कर के बीच उचित समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि उद्योगों पर अनावश्यक वित्तीय भार न पड़े।
फेडरेशन ने कहा कि उद्योगों से प्राप्त संधारण शुल्क का उपयोग पहले से ही औद्योगिक क्षेत्रों की सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के रख-रखाव में किया जाता है। इसलिए इस व्यवस्था का युक्तियुक्तकरण आवश्यक है।
नक्शा स्वीकृति में सिंगल विंडो एवं डिम्ड अप्रूवल
औद्योगिक भवनों के नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाने के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया। फेडरेशन ने मांग की कि औद्योगिक क्षेत्रों में आवंटित भूमि पर निर्माण संबंधी अनुमतियों के लिए एक ही सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाए।
साथ ही 30 दिवस की समय-सीमा (लोक सेवा गारंटी) निर्धारित करने तथा निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं होने की स्थिति में ऑनलाइन डिम्ड अप्रूवल का प्रावधान करने का सुझाव दिया गया। इससे उद्योग स्थापना एवं विस्तार परियोजनाओं में होने वाली देरी कम होगी और निवेशकों में विश्वास बढ़ेगा।
निवेश एवं औद्योगिक विस्तार को मिलेगी गति
FMPCCI ने कहा कि यदि प्रक्रियाओं को सरल किया जाता है और अनुमतियां समयबद्ध रूप से मिलती हैं, तो इससे नए निवेश, मौजूदा उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और एम एस एम ई विकास को गति मिलेगी। इससे मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि FMPCCI प्रदेश के उद्योगों की समस्याओं को शासन के समक्ष निरंतर उठाता रहेगा तथा नीतिगत सुधारों के माध्यम से मध्यप्रदेश को निवेश, विनिर्माण, व्यापार एवं एम एस एम ई के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के लिए शासन के साथ मिलकर कार्य करेगा।
फेडरेशन के अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि प्रदेश का उद्योग एवं व्यापार जगत सरकार से किसी विशेष सुविधा की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक नियम एवं प्रक्रियाएं चाहता है। नियमों का सरलीकरण होने से उद्यमी अपना अधिक समय उत्पादन, निवेश, रोजगार सृजन, नवाचार एवं बाजार विस्तार में लगा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा का दौर है। प्रदेश के उद्योगों को देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा करनी है। इसके लिए कम से कम प्रक्रियात्मक बाधाएं, त्वरित अनुमतियां और बेहतर कारोबारी वातावरण अत्यंत आवश्यक हैं। फेडरेशन इसी उद्देश्य से शासन और उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद का माध्यम बनकर कार्य कर रहा है।
संपत्ति कर के दोहरे भार से राहत की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने औद्योगिक क्षेत्रों में संपत्ति कर के दोहरे भार का विषय प्रमुखता से उठाया। फेडरेशन ने सुझाव दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों में लिए जाने वाले संधारण शुल्क और नगर निकायों द्वारा लगाए जाने वाले संपत्ति कर के बीच उचित समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि उद्योगों पर अनावश्यक वित्तीय भार न पड़े।
फेडरेशन ने कहा कि उद्योगों से प्राप्त संधारण शुल्क का उपयोग पहले से ही औद्योगिक क्षेत्रों की सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के रख-रखाव में किया जाता है। इसलिए इस व्यवस्था का युक्तियुक्तकरण आवश्यक है।
नक्शा स्वीकृति में सिंगल विंडो एवं डिम्ड अप्रूवल
औद्योगिक भवनों के नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाने के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया। फेडरेशन ने मांग की कि औद्योगिक क्षेत्रों में आवंटित भूमि पर निर्माण संबंधी अनुमतियों के लिए एक ही सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाए।
साथ ही 30 दिवस की समय-सीमा (लोक सेवा गारंटी) निर्धारित करने तथा निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं होने की स्थिति में ऑनलाइन डिम्ड अप्रूवल का प्रावधान करने का सुझाव दिया गया। इससे उद्योग स्थापना एवं विस्तार परियोजनाओं में होने वाली देरी कम होगी और निवेशकों में विश्वास बढ़ेगा।
निवेश एवं औद्योगिक विस्तार को मिलेगी गति
FMPCCI ने कहा कि यदि प्रक्रियाओं को सरल किया जाता है और अनुमतियां समयबद्ध रूप से मिलती हैं, तो इससे नए निवेश, मौजूदा उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और एम एस एम ई विकास को गति मिलेगी। इससे मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि FMPCCI प्रदेश के उद्योगों की समस्याओं को शासन के समक्ष निरंतर उठाता रहेगा तथा नीतिगत सुधारों के माध्यम से मध्यप्रदेश को निवेश, विनिर्माण, व्यापार एवं एम एस एम ई के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के लिए शासन के साथ मिलकर कार्य करेगा।