- लोकतांत्रिक अधिकार मोर्चा, मध्यप्रदेश की बैठक संपन्न
- 22 नवंबर को जबलपुर में आयोजित होगी विशाल जनसभा
सर्वसम्मति से संयोजक मंडल एवं पदाधिकारियों का गठन
मोर्चे के कामकाज को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए सर्वसम्मति से कमलेश टेकाम (प्रदेश अध्यक्ष, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी) को प्रदेश संयोजक चुना गया। इसके साथ ही मोनू यादव (प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय जनता दल), विजय कुमार (प्रदेश प्रभारी, भाकपा-माले रेड स्टार), आनंद श्याम (प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी), रतनलाल बाथम (प्रतिनिधि, समाजवादी पार्टी) और महेंद्र राव (प्रदेश अध्यक्ष, मालवा कांग्रेस) को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। के. के. माहौर (प्रदेश अध्यक्ष, इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी) को कोषाध्यक्ष, विजय कुमार को प्रवक्ता, अशोक सिंह बघेल (प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय समाज पक्ष) को सह-प्रवक्ता तथा समाधान पाटिल (रचनात्मक कांग्रेस) को मीडिया एवं सोशल मीडिया प्रभारी चुना गया।
22 नवंबर को जबलपुर में विशाल जनसभा का निर्णय
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 22 नवंबर 2026 को जबलपुर में एक विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी। यह जनसभा विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक शक्तियों की एक संयुक्त पहल होगी। इसके माध्यम से जनता की रोजमर्रा की आजीविका के सवालों को लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की व्यापक लड़ाई से जोड़ते हुए प्रदेश में एक मजबूत साझा जनआवाज बुलंद की जाएगी। जनसभा की तैयारी के सिलसिले में प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क, बैठकें, जनसंवाद और स्थानीय मुद्दों पर अभियानों का संचालन किया जाएगा।
जनसभा में प्रदेश के मेहनतकशों, वंचितों और आम नागरिकों के मुख्य सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसमें जातिगत जनगणना कराने व पिछड़े वर्गों के सटीक आंकड़े जारी करने, संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा (PESA) कानून और वन अधिकार कानून, 2006 को सख्ती से लागू करने, तथा जल-जंगल-जमीन पर कॉरपोरेट कब्जे, अवैध बेदखली और विस्थापन के खिलाफ संघर्ष तेज करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही, भूमिहीन दलितों, आदिवासियों व गरीबों के लिए भूमि-आवास का अधिकार, किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य व कर्ज राहत, मजदूरों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम मजदूरी व सामाजिक सुरक्षा, युवाओं के लिए स्थायी रोजगार, और शिक्षा, स्वास्थ्य व सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक का सवाल बुलंद किया जाएगा। जनसभा में महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा व उत्पीड़न को रोकने, अभिव्यक्ति और असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा करने, आंदोलनकारियों पर दमन बंद करने, तथा ईवीएम की पारदर्शिता और चुनाव आयोग सहित सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता व जवाबदेही बहाल करने की पुरजोर मांग की जाएगी।
बैठक में इस निष्कर्ष को रेखांकित किया गया कि मध्यप्रदेश में विभिन्न वर्गों और समुदायों के पृथक-पृथक चल रहे संघर्षों को लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और जनअधिकारों की व्यापक लड़ाई से जोड़ना आज की ऐतिहासिक आवश्यकता है। लोकतांत्रिक अधिकार मोर्चा इसी दिशा में विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक धाराओं के बीच निरंतर संवाद और संयुक्त कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा।
मोर्चे ने प्रदेश के समस्त लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों, जनसंगठनों, किसान-मजदूर संगठनों, छात्र-युवा व महिला संगठनों, आदिवासी-दलित-अल्पसंख्यक समूहों, नागरिक अधिकार मंचों और जनआंदोलनों से 22 नवंबर की जबलपुर जनसभा को सफल बनाने तथा व्यापक लोकतांत्रिक मोर्चा बनाने में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।