अपहृत नाबालिग बेटी पूजा की बरामदगी के लिए दो साल से परिवार सहित धरने पर बैठी मां आशा के सब्र का बांध गुरुवार को टूट गया। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा व तानों से परेशान आशा आज विकास भवन में अधिकारियों साथ बैठक ले रहे प्रमुख सचिव अनिल कुमार के सामने आत्मदाह करने के लिए चल पड़ी। उसके हाथ में मिट्टी तेल की पिपिया देख कलेक्ट्रेट में तैनात महिला पुलिस कर्मियों ने उसे दबोच लिया, जिसके बाद आशा फूट फूटकर रो पड़ी।
बेटी के लिए दो साल से परिवार सहित धरने पर बैठी है आशा
शहर कोतवाली के मोहल्ला बिजलीपुरा निवासी अशोक भोजवाल की नाबालिग बेटी पूजा का मोहल्ले के ही कुछ लोग 9 अक्टूबर 2012 को तमंचे के बल पर अपहरण कर लिया था। जिसकी शिकायत थाने में की गयी लेकिन पुलिस महीना भर तक हीलाहवाली करती रही। बाद में मामला एसपी के पास पहुंचा तो एसपी के निर्देश पर जैसे-तैसे रिपोर्ट दर्ज हुई। इसके बाद पुलिस खामोश होकर बैठ गई। पीड़ित परिवार थाने और पुलिस कार्यालय के चक्कर लगाता रहा, लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी। पुलिस की कार्यप्रणाली से निराश होकर अशोक अपनी पत्नी आशा व तीन छोटे बच्चों के साथ 8 जनवरी को कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठ गया। तब से आज तक कई एसपी और डीएम बदल चुके हैं और सभी ने आज तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं दिया। इस बीच अधिकारियों ने उसे कई बार धरने से हटाने की कोशिश भी की, लेकिन कामयाब नहीं हुए। गत वर्ष दौरे पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार तक ने इस परिवार के आंसू पोछने के बजाय धरने से हटने की चेतावनी दे डाली थी। गत दिवस एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने आशा पर भद्दा तंज कस दिया। इससे बिफरी आशा आज विकास भवन में डीएम के साथ बैठक ले रहे प्रमुख सचिव अनिल कुमार के सामने आत्मदाह करने के लिए चल पड़ी। हालांकि प्रशासन को पहले से ही किसी हरकत की उम्मीद थी, इसलिए आशा की निगरानी के लिए महिला पुलिस तैनात कर रखी गई थी। मिट्टी तेल की पिपिया लिए आशा जैसे ही विकास भवन के गेट पर पहुंची, महिला पुलिस कर्मियों ने उसे दबोच लिया। जिसके बाद आशा फफक फफक कर रो पड़ी।