शिखा दास, बिलासपुर/रायपुर.
बिलासपुर
के नसबंदी कांड के बाद दुनियाभर में हो रही आलोचना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार
ने मुख्य आरोपी सर्जन डॉ. आरके गुप्ता को बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही
बिलासपुर के सीएमएचओ डॉ. आरके भांगे को भी बर्खास्त कर दिया है। इसके
साथ ही सरकार ने मान लिया है कि नसबंदी प्रकरण में एक बैगा महिला की भी मौत
हुई है। न्यायिक जांच के बारे में भी सरकार ने निर्णय कर लिया है।
हालांकि, इतनी फजीहत के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के खिलाफ
सरकार किसी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। सरकार के रुख से साफ
जाहिर है कि वह स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा लेने को तैयार नहीं है और अमर
अग्रवाल फिलहाल सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं।
नसबंदी के दौरान गडबडी के कारण अब तक 15 महिलाओं की मौत
पंचायत व ग्रामीण विकास
मंत्री अजय चंद्राकर ने कैबिनेट की आपात बैठक के बाद कहा है कि इन महिलाओं
के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी और उनके आश्रितों का पूरा ख्याल रखा
जाएगा। चंद्राकर ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर कहा कि रमन
सरकार की प्राथमिकता अभी प्रभावित महिलाओं को समुचित इलाज उपलब्ध कराने की
है, क्योंकि 12 महिलाएं अब भी वेंटीलेटर पर हैं। हैदराबाद अपोलो से आई एक
टीम इन प्रभावित मरीजों की स्थिति पर निगाह रखे हुए है।
हैदराबाद अपोलो की टीम जुटी है इलाज और मदद में
चंद्राकर
ने कहा कि डॉ. आरके गुप्ता ने नसबंदी शिविर के लिए निर्धारित गाइड लाइंस
का कोई पालन नहीं किया, वो सब देख सकते हैं। डॉ. आरके गुप्ता द्वारा 50,000
नसबंदी आपरेशन करने के बाद उन्हें सरकार की ओर से पुरस्कृत किए जाने के
सवाल पर चंद्राकर ने कहा कि डॉ. गुप्ता अपने इस योगदान के कारण भगवान नहीं
हो जाते हैं, उन्हें निर्धारित मापदंडों का पालन करना चाहिए था। डॉ.
चंद्राकर ने कहा कि सरकार पूरे मसले पर संवेदनशीलता दिखा रही है। दवाओं की
रिपोर्ट आने में अभी 15 दिन लग जाएंगे और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं
जाएगा। संरक्षित जनजाति बैगा महिलाओं के केवल दो नसबंदी आपरेशन की बात
चंद्राकर ने मानी है। उनका कहना है कि अब तक 18 अन्य आपरेशनों के बारे में
सरकार को कोई जानकारी नहीं है। चंद्राकर ने कहा कि कुल 122 महिलाएं
प्रभावित हुई हैं। इनमें से 28 का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। शेष
महिलाओं का इलाज अन्य अस्पतालों में चल रहा है। करीब 11-12 महिलाएं
वेंटीलेटर पर हैं।
अब तक 15 महिलाओं के मरने की हुई पुष्टि
बिलासपुर
जिले के पेंड्रा और गोरैला में विभिन्न नसबंदी शिविरों में अब तक 18 बैगा
महिलाओं के आॅपरेशन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुधवार को
पेंड्रा से दो बैगा महिलाओं को बिलासपुर के छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट आॅफ
मेडिकल साइंसेस (सिम्स) में भर्ती कराया गया था। जहां इनमें से एक की
मृत्यु हो गई थी। बैगा संरक्षित जनजाति है, जिनकी घटती जनसंख्या के
मद्देनजर नसबंदी नहीं की जा सकती।
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने गुरुवार को
बिलासपुर में अस्पताल का दौरा करने के बाद पूरे मामले की न्यायिक जांच
कराने की घोषणा कर दी है। बिलासपुर आने से पहले मुख्यमंत्री ने रायपुर में ही एक
उच्चस्तरीय बैठक ली थी, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल भी शामिल हुए
थे। फिलहाल लग रहा है कि अमर अग्रवाल पर से संकट के बाद छंट गए हैं, लेकिन
जांच के निष्कर्ष तय करेंगे कि अमर अग्रवाल का इस्तीफा होता है या नहीं।
गौरतलब होगा कि, अमर अग्रवाल छत्तीसगढ़ में भाजपा की बुनियादी जमावट करने
वाले लख्खीराम अग्रवाल के बेटे हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह के राजनीतिक
कैरियर में लख्खीराम अग्रवाल का बड़ा हाथ रहा है।

