भोपाल। मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर्स ने बुधवार को एनएमसी बिल के विरोध में हड़ताल पर रहे। हालांकि ये हड़ताल सिर्फ 3 घंटे की रही। डॉक्टर्स ने बुधवार को ओपीडी का बहिष्कार किया। पूरे देश में डॉक्टर 24 घंटे की हड़ताल पर रहेंगे, लेकिन मध्य प्रदेश में ये हड़ताल सिर्फ 3 घंटे की रही।
लोकसभा में पास हुए एनएमसी बिल का देशभर में डॉक्टर विरोध कर रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शनिवार को मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स ने अपना काम बंद रखा। प्रदेश भर में डॉक्टर्स 3 घंटे के लिए हड़ताल पर रहे। हड़ताल सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक रही। डॉक्टर्स ने ओपीडी का बहिष्कार कर दिया लेकिन इमरजेंसी सेवा चालू रखी गईं। गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध भोपाल के हमीदिया और सुल्तानिया अस्पताल के जूनियर डॉक्टर भी इस हड़ताल में शामिल रहे।
लोकसभा में पास हुए एनएमसी बिल का देशभर में डॉक्टर विरोध कर रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शनिवार को मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स ने अपना काम बंद रखा। प्रदेश भर में डॉक्टर्स 3 घंटे के लिए हड़ताल पर रहे। हड़ताल सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक रही। डॉक्टर्स ने ओपीडी का बहिष्कार कर दिया लेकिन इमरजेंसी सेवा चालू रखी गईं। गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध भोपाल के हमीदिया और सुल्तानिया अस्पताल के जूनियर डॉक्टर भी इस हड़ताल में शामिल रहे।
एनएमसी बिल का विरोधमध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) के अध्यक्ष डॉ. सचेत सक्सेना ने बताया कि वे इस बिल से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। बिल की कुछ बातें छात्र विरोधी हैं। इसमें कुछ व्यवस्थाएं ऐसी हैं, जिसके कारण गरीब मरीजों को नुकसान होगा।डॉ. सक्सेना का कहना है लोकसभा में ये बिल बिना संशोधन के पास हुआ है। इससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पडेगा।
