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कृषि क्षेत्र में नवाचारों को अपना रहे हैं किसान

भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत गठित स्व-सहायता समूहों के सदस्यों ने संवहनीय आजीविका और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन परियोजना से जुड़कर नवाचारों को अपनाया है। इससे न केवल उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई है, अर्थात कृषि जिंसों की लागत में भी कमी आई है। परियोजना में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस सिलसिले में प्रदेश के 100 समुदाय स्रोत व्यक्तियों (सीआरपी) को हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान एवं पंचायती राज कैम्पस में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

परियोजना के अन्तर्गत उत्पादन के क्षेत्र में श्री विधि, डीएसआर, सघन फसली, पशुपालन और मुर्गी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। इसमें किसानों को ग्राम स्तर पर ऋण भी उपलब्ध कराया गया है।

प्रदेश के मण्डला और श्योपुर जिले में इस परियोजना से किसानों के आर्थिक और सामाजिक स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने में आयी है। परियोजना से जुड़े किसानों की अन्य किसानों से तुलना पर यह तथ्य साफतौर पर रेखांकित हुआ है। परियोजना से जुड़े किसानों का उत्पादन 2014 की तुलना में 5 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बढ़ा है तथा कृषि जिंसों में लागत लगभग 2 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर कम हुई है। इस परियोजना से महिला किसानों के परिवार में निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई है और खेती में कृषि यंत्र भण्डार के उपयोग से मजदूरी और बोझ में कमी आयी है।

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