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केंद्र ने कहा- सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त बल भेज रहे; आरपीएफ अफसर ने कहा- घाटी में हालात बदतर होंगे

  • केंद्र ने कश्मीर में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती का फैसला किया, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस इसके खिलाफ
  • केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा- पीडीपी और एनसी को जनादेश खोने का डर, इसलिए जबर्दस्ती शोर मचा रहे
  • कश्मीर में पदस्थ आरपीएफ अफसर ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा- चार महीने का राशन इकट्ठा कर लें
  • सोशल मीडिया पर दावा- प्रशासन ने श्रीनगर की मस्जिदों की लिस्ट मांगी; सरकार ने इसे अफवाह बताया
नई दिल्ली। कश्मीर को लेकर सोमवार को नए घटनाक्रम हुए। जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक कथित आदेश पर विवाद हो गया, जिसमें श्रीनगर की सभी मस्जिदों की सूची तैयार करने को कहा गया था। वहीं, कश्मीर में पदस्थ रेलवे सुरक्षा बल के एक अफसर ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा कि घाटी में हालात बदतर होंगे, इसलिए एहतियातन चार महीने का राशन और सात दिन का पानी रिजर्व रखना चाहिए। उधर, केंद्र ने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि कश्मीर में सुरक्षा बलों के 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती का फैसला सिक्युरिटी ड्रिल के तहत लिया गया है।
मस्जिदों की लिस्ट तैयार करने के आदेश को सरकार ने अफवाह करार दिया

श्रीनगर प्रशासन के एक आदेश की कॉपी सोमवार को वायरल हुई। इसमें दावा किया गया कि श्रीनगर के एसएसपी ने पुलिस अफसरों से शहर की सभी मस्जिदों की लिस्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपने का आदेश दिया है। इससे इन अटकलों को बल मिला कि केंद्र जम्मू-कश्मीर के लोगों को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 35ए को हटाने की तैयारी में है। हालांकि, मस्जिदों की सूची तैयार करने के आदेश को सरकार के सलाहकार विजय कुमार ने अफवाह करार दिया।
घाटी के हालात को बदतर बताने वाले अफसर का तबादला
बड़गाम में पदस्थ रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सुरक्षा आयुक्त सुदेश नुग्याल का कर्मचारियों को लिखा पत्र भी वायरल हुआ। इस पत्र में उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को कम से कम चार महीने का राशन और सात दिन का पीने का पानी इकट्ठा कर लेना चाहिए क्योंकि कश्मीर में हालात बदतर होने का अंदेशा है। हालांकि, आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने कहा कि यह विवादास्पद पत्र जारी करने वाले सहायक सुरक्षा आयुक्त का तबादला कर दिया गया है, क्याेंकि अफसर ने जो बातें कहीं, उनका कोई आधार नहीं है।
केंद्र ने कहा- सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर रहे
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि केंद्र घाटी में सुरक्षा बढ़ाने के मद्देनजर सुरक्षा बलों के 10 हजार अतिरिक्त बलों की तैनाती कर रहा है। इस पर पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे दल इसलिए शोर मचा रहे हैं क्योंकि उन्हें जनादेश खोने का डर सता रहा है। उन्हें डर है कि अगर हालात बदले तो 30-40 साल से चल रहा उनका प्रभुत्व खत्म हो जाएगा।
महबूबा ने कहा- फारुक अब्दुल्ला सर्वदलीय बैठक बुलाएं
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को कहा कि उन्होंने प्रदेश के विशेष दर्जे की रक्षा के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है। मुफ्ती ने ट्वीट किया, ‘‘हालिया घटनाक्रम से जम्मू-कश्मीर के लोगों में घबराहट पैदा हो गई है। इसलिए मैंने डॉ. अब्दुल्ला साहब से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है। एकजुटता के साथ जवाब देना वक्त की जरूरत है। हम कश्मीर के लोगों को एकजुट होने की जरूरत है।’’ फारुक अब्दुल्ला ने इस पर कहा कि वे सर्वदलीय बैठक के सुझाव पर सकारात्मकता के साथ विचार कर रहे हैं।
अनुच्छेद 35ए के तहत मिलती है पूर्ण नागरिकता
जिस अनुच्छेद-35ए की चर्चा हो रही है, वह अनुच्छेद 370 का एक हिस्सा है। यह कश्मीर के लोगों को विशेष अधिकार देता है। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य के नागरिकों को पूर्ण नागरिकता प्रदान करती है। राज्य के बाहर का कोई भी व्यक्ति यहां किसी प्रकार की संपत्ति नहीं खरीद सकता। यहां की महिला से शादी के बाद उसकी संपत्ति पर अपना हक नहीं जमा सकता।
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