भाेपाल। टाइगर रिजर्व में सिर्फ बाघों का संरक्षण नहीं हो रहा, बल्कि ये हर साल देश की बड़ी आबादी को शुद्ध ऑक्सीजन और स्वच्छ पानी जैसी 4230.31 करोड़ से लेकर 16324.11 करोड़ रुपए कीमत की पारिस्थितिकी सेवाएं दे रहे हैं। ये हजारों करोड़ रुपए के स्वास्थ्य लाभ भी हमें प्रदान करते हैं। अकेले मध्यप्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व में 13745.53 करोड़ रुपए के प्राकृतिक संसाधन जमा हैं। इसके अतिरिक्त यह हर साल 6954.56 करोड़ रुपए की पारिस्थितिकी सेवाएं मुहैया करा रहा है। यह अपने चारों ओर की आबादी को हर साल 14455.42 करोड़ के स्वास्थ्य लाभ देता है। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) भोपाल के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल सर्विस मैनेजमेंट ने देशभर के 10 टाइगर रिजर्व की इकोनॉमिक वैल्यू का आकलन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला है।
इस रिपोर्ट को ‘इकोनॉमिक वैल्यू ऑफ टाइगर रिजर्व इन इंडिया: ए वैल्यू+एप्रोच (फेस-2) नाम दिया गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व पर हर साल सरकार जितना खर्च करती है, उसके बदले 1939.36 करोड़ रुपए अधिक के संसाधन यहां भविष्य के लिए तैयार हो रहे हैं।
इस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में फैले टाइगर रिजर्व काष्ठ के रूप में कार्बन स्टोरेज और वाटर स्टोरेज का काम कर रहे हैं। वातावरण के बेहतर बनाने के लिए आॅक्सीजन उत्पादक और कार्बन डाई आक्साइड के अवशोषक का बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के लिए इस रिपोर्ट को आईआईएफएम भोपाल की प्रोफेसर मधु वर्मा, चारु तिवारी, सुनीता आनंद, अद्वैत ईदगांवकर और आशीष डेविड ने मिलकर इस रिपोर्ट को तैयार किया है।