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प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण उद्योग के व्यापक अवसर

भोपाल। मैग्नीफिसेंट एमपी, इन्वेस्टर्स समिट 2019 में आज 'फीडिंग इंडिया-अपार्च्युनिटीज इन फूड प्रोसेसिंग'' सत्र में इन्वेस्टर्स को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण श्री इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण उद्योग के लिये व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। यहाँ सस्ती जमीन, बिजली तथा पानी सहित अन्य आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि दो जिलों होशंगाबाद के बाबई तथा छिंदवाड़ा में हार्टीकल्चर हब में निवेश के अवसर हैं। यहाँ ग्रीन हाउस, कोल्ड स्टोरेज आदि के लिये पाँच लाख रूपये प्रति एकड़ के नॉमिनल रेट पर जमीन दी जा रही है। शासन द्वारा खाद्य प्र-संस्करण उद्योग के लिये 25 प्रतिशत अनुदान अधिकतम 2.5 करोड़ रूपये और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिये 50 प्रतिशत अनुदान अधिकतम 10 करोड़ रूपये तक दिया जा रहा है। प्रदेश संतरा, टमाटर, लहसुन, तिलहन और दलहन के उत्पादन में देश में अग्रणी स्थान रखता है।

श्री बैंस ने कहा कि प्रदेश में प्र-संस्करित खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये औद्योगिक माँग के अनुरूप गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिये कृषकों को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश में सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती 300 एकड़ भूमि पर की जा रही है। अगले वर्ष 2000 एकड़ में इनके उत्पादन का लक्ष्य है।
एम.पी. में निवेश का उचित समय अभी : आईटीसी सीईओ श्री दर
आईटीसी के सीईओ श्री चितरंजन दर ने कहा कि मध्यप्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ हैं। प्रदेश में पैकेज्ड फूड में व्यापक अवसर है। मसाला उद्योग, डिहाइड्रेड ऑनियन, टमाटर प्यूरी, फलों के जूस आदि उद्योगों के अनुकूल व्यवस्थाएँ हैं। उन्होंने कहा कि एम.पी. में निवेश का उचित समय अभी है। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के नेतृत्व में शासकीय मशीनरी तत्परता से सकारात्मक सहयोगी की भूमिका निभा रही है। प्रदेश की स्थिति लॉजिस्टिक के दृष्टिकोण से भी लाभप्रद है।

सीईओ श्री दर ने कहा कि “मैं सरकार के सहयोगात्मक रवैये से बहुत संतुष्ट हूँ। पहली बार ऐसा हो रहा है कि सरकार अति सक्रियता से निवेश हेतु कार्यों को पूरा कर रही है।“
प्रदेश की निवेश संवर्धक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही : महिन्द्रा एग्री एम.डी. श्री शर्मा
महिन्द्रा एग्री के एमडी श्री अशोक शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार की निवेश संवर्धक नीति और कागजी कार्यवाही में समय की बचत, निवेशकों को आकर्षित कर रही है। भारत का 40 प्रतिशत ऑर्गेनिक उत्पाद मध्यप्रदेश में होता है। हम नयी और उन्नत किस्म के उत्पादन को बढ़ावा देकर निर्यात आधारित प्र-संस्करित खाद्य उत्पाद निर्मित कर सकते हैं। इससे किसानों की आय में भी अपेक्षित वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि पब्लिक-प्रायवेट-फारमर्स समूह बनने चाहिये, जिससे मांग के अनुरूप किस्म की गुणवत्तायुक्त उपज मिल सके।

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