नई दिल्ली। शीतकालीन सत्र के एक हफ्ते बाद सोमवार को राज्यसभा के मार्शल बिना पगड़ी के पुरानी वर्दी में नजर आए। उच्च सदन की 250वीं बैठक के मौके पर सचिवालय ने 18 नवंबर को मार्शलों की ड्रेस बदली थी। इसके आर्मी की यूनिफॉर्म से मिलता-जुलता होने पर पूर्व सेना प्रमुखों समेत विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई थी। अगले ही दिन सभापति वेंकैया नायडू ने ड्रेस में बदलाव के सुझावों पर विचार करने की बात कही थी। फिर 21 नवंबर को मार्शलों ने कैप नहीं लगाई, तब सभापति ने कहा था- अब कुछ भी आर्मी जैसा नहीं दिखेगा।
अब नई ड्रेस का रंग ओलिव ग्रीन हुआ
शीत सत्र की कार्यवाही के छठे दिन सभापति की आसंदी के पास खड़े दो मार्शल डार्क कलर के जोधपुरी सूट में नजर आए। इसका रंग ओलिव ग्रीन है, जो कि नई मिलिट्री स्टाइल ड्रेस से बिल्कुल अलग है। एक कांग्रेस सदस्य ने इस पर टिप्पणी की- वेरी स्मार्ट। राज्यसभा के मार्शल करीब 50 साल से ब्राउन जोधपुरी सूट और पगड़ी पहन रहे थे।
ड्रेस बदलने पर कांग्रेस सांसद बोले थे- क्या मार्शल लॉ लागू होगा
इसके बाद 19 नवंबर को मार्शलों की ड्रेस बदली गई थी। तब सभापति के पास खड़े होने वाले दो मार्शल मिलिट्री जैसी कैप और डार्क ब्लू ड्रेस में थे। लेकिन सांसदों की बेंच के पीछे कागजात बांटने और उन्हें एकत्रित करने वाले करीब 12 मार्शल अपनी पुरानी ड्रेस और पगड़ी पहन रहे थे। मार्शलों की नई ड्रेस पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सभापति से कहा था कि क्या मार्शल लॉ लागू करने वाले हैं।
मार्शलों ने खुद ड्रेस बदलने की मांग की थी: सचिवालय
इस विवाद पर राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों ने कहा था कि मार्शलों ने खुद ड्रेस कोड को बदलकर मॉडर्न और यूजर फ्रेंडली करने की मांग की थी। इसके बाद नेशलन इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन ने नई ड्रेस तैयार की। इसके लिए 4 से 5 विधानसभाओं के मार्शलों की ड्रेस का अध्ययन किया गया था।
