जम्मू। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने मंगलवार को कहा कि, 2019 में 160 आतंकी मारे गए तो 102 पकड़े गए। हालांकि, अभी भी घाटी में 250 से ज्यादा आतंकी सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि, आतंक का रास्ता अपनाने वाले युवाओं की संख्या घटी है। 2018 में जहां 218 स्थानीय युवाओं ने बंदूक थामी थी तो वहीं 2019 में यह संख्या घटकर 139 रह गई है। इस बीच कश्मीर में मंगलवार आधी रात से एसएमएस सेवाएं शुरू हो जाएंगी।
डीजीपी ने बताया कि,इस साल जिन स्थानीय युवाओं ने आतंक का दामन थामा था, उसमें से केवल 89 ही जिंदा बचे हैं। बाकी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों के ऑलआउट ऑपरेशन के चलते कुछ ही पुराने आतंकी बचे हैं। इसमें जहांगीर सरूरी और रियाज नईकू हैं।
डीजीपी ने कहा- पुलिस कानून व्यवस्था बनाने में सफल रही
पुलिस मुख्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी ने बताया कि, पिछले साल के मुकाबले इस साल आतंकी घटनाओं में तीस फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, कानून व्यवस्था से जुड़ी घटनाएं भी पिछले साल के मुकाबले 36 फीसदी कम रहीं। इसके अलावा आतंकी घुसपैठ की घटनाओं में भी कमी आई है। उन्होंने बताया, साल 2019 में लगभग 130 आतंकी घुसपैठ करने में कामयाब रहे जबकि 2018 में यह आंकड़ा 143 था।
कश्मीर में मंगलवार आधी रात से एसएमएस सेवाएं शुरू हो जाएंगी
सरकार ने जम्मू और कश्मीर को नए साल का तोहफा दिया है। राज्य में आज आधी रात से एसएमएस सेवाएं चालू हो जाएंगी। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सचिव रोहित कंसल ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया,‘‘कश्मीर में मंगलवार आधी रात से एसएमएस सेवाएं शुरू की जा रही हैं। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में 31 दिसंबर की आधी रात से ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।’’
केंद्र सरकार ने इसी साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था। इसके बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में सभी नेटवर्क और लैंडलाइन कनेक्शन सस्पेंड कर दिए गए थे। 14 अक्टूबर को इस केंद्र शासित प्रदेश में पोस्टपेड मोबाइल सेवाएं शुरू कर दी गईं थी।
