भोपाल। छिन्दवाड़ा में आयोजित राज्य स्तरीय कॉर्न फेस्टिवल में आज दूसरे और अन्तिम दिन प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये मक्का उत्पादक किसानों की मक्का फसल विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के साथ चर्चा हुई। चर्चा में देश के अग्रणी कृषि शोध संस्थानों के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को मक्के के फायदों, मक्का उत्पादन में वृद्धि, मक्का के पारम्परिक तथा व्यवसायिक उपयोग के अलावा अन्य उपयोगी जानकारी दी गई।
फेस्टिवल में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मक्के के उन्नत बीजों एवं खेती, मक्के की सिंगल क्रॉस हाइब्रिड बीजों की खेती, मक्के के औषधीय गुणों, पशुपालन में उपयोग एवं कपड़ा उद्योग, तेल उत्पादन आदि, मक्का फसल उत्पादन में बीजों की गुणवत्ता और उनका महत्व स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती से संबंधित जानकारी दी। परिचर्चा में मक्के की खेती और मक्का आधारित उद्योगों को स्थापित करने के लिये जरूरी संसाधनों और फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना पर भी चर्चा की गई।
प्रदर्शनी रही आकर्षण का केन्द्र
फेस्टिवल में आयोजित प्रदर्शनी दूसरे दिन भी आकर्षण का केन्द्र बनी रही। प्रदर्शनी को मक्का उत्पादक किसानों और आमजनों ने रुचि और जिज्ञासा के साथ देखा। प्रदर्शनी में किसानों को खेती के लिये वित्तीय मदद और जैविक कृषि को बढ़ाने के संबंध में जानकारी दी गई। प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को अलग-अलग भूमि तथा पर्यावरण के अनुकूल मक्का की कौन-सी प्रजातियाँ हैं, इसके बारे में जानकारी दी जा रही है। प्रदर्शनी में उद्यानिकी उत्पादों से संबंधित कम्पनियों के स्टॉल लगाये गये हैं। प्रदर्शनी में कृषि से जुड़े बड़े सेंटरों का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। इसमें किसानों से तत्काल ऑनलाइन स्पाट बुकिंग कराकर किसानों को उपलब्ध कराने का प्रावधान भी रखा गया है।
लोगों ने चखे लजीज व्यंजन
फेस्टिवल में आज भी लजीज व्यंजन आकर्षण का केन्द्र रहे। फूड जोन में हल्दीराम, इंदौर सराफा, मध्यप्रदेश पर्यटन निगम एवं विभिन्न सहायता समूहों द्वारा लगाये गये स्टॉल में मक्के के 200 से अधिक स्वादिष्ट व्यंजनों का जायका लोगों को मिला। फूड जोन में बनाई गई पातालकोट की रसोई भी आकर्षण का केन्द्र बनी रही। आमजनों ने जनजातीय पारम्परिक व्यंजनों का उत्साह से लुत्फ उठाया। इस रसोई में पातालकोट के जनजातीय लोगों द्वारा खाये जाने वाले पारम्परिक व्यंजन मक्के की रोटी, बल्लर की सब्जी, बल्लर और बरबटी की मिक्स दाल, कुटकी का भात, मक्के का हलुआ जन-सामान्य ने बहुत पसंद किया।
