इंदौर। ‘बेटियां पराया धन हैं, शादी होकर अपने ससुराल चली जाएंगी, बेटा पढ़-लिख लेगा तो बुढ़ापे का सहारा बनेगा’, माता-पिता की इसी सोच को बदलने के लिए बंजारा जन विकास सेवा समिति ने अनूठी पहल शुरू की। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत करते हुए संस्था तीन साल में कन्या को जन्म देने वाले 1345 माता-पिता का सम्मान कर चुकी है। इसमें बंजारा समाज के 365 माता-पिता भी शामिल हैं। समाज में जिन परिवारों में सिर्फ बेटियां हैं, ऐसे 180 परिवारों को भी सम्मानित कर चुके हैं।
समिति की स्थापना 1 जनवरी 2017 को की गई। अध्यक्ष प्रकाश मानावत कहते हैं कई परिवारों में आज भी बेटा-बेटी में भेदभाव होता है। बेटे को निजी स्कूल में पढ़ाते हैं तो बेटी को सरकारी व कम फीस वाले स्कूल में दाखिला दिला देते हैं। इसी भेदभाव को खत्म करना समिति का लक्ष्य है। पिछले साल समिति ने दो निर्धन बेटियों को गोद लिया है। इस साल से हर साल पांच निर्धन बेटियों को गोद लेकर उनकी पढ़ाई से लेकर शादी तक का खर्च उठाएंगे।
भ्रूण हत्या न करने के लिए भरवाए जाते हैं संकल्प पत्रसार्वजनिक और निजी प्रदर्शनी में आने वाले लोगों को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की जानकारी दी जाती है। साथ ही लोगों से संकल्प पत्र भरवाए जाते हैं कि भ्रूण हत्या न की जाए। शासकीय और निजी स्कूलों के 10वीं-12वीं के छात्र-छात्राओं को समझाइश दी जाती है कि वे अपने परिजनों को समझाएं कि बेटे-बेटी में फर्क न करें। सार्वजनिक स्थानों पर पैम्फ्लेट बांटकर बेटी की सुरक्षा लिए जागरूक किया जाता है। गरीब बस्तियों में छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षण सामग्री वितरित की जाती है। 1 जनवरी से 10वीं-12वीं के निर्धन छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग स्कीम नंबर-71 स्थित जगदीशपुरी में दी जाएगी।
स्वास्थ्य शिविर में 2 लाख मरीज उठा चुके हैं लाभ2 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर चुके हैं। इसमें आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी, एलोपैथिक, जनरल स्वास्थ्य, नेत्र रोग, मोतियाबिंद ऑपरेशन, दंत रोग आदि विभिन्न तरह के मरीज स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं। मरीजों को नि:शुल्क दवाई वितरण भी करते हैं।
