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पढ़िए संकट चौथ व्रत महत्व और कथा


लोहड़ी के साथ ही आज संकष्टी चतुर्थी व्रत भी है। आम बोलचाल में लोग इसे संकट चौथ भी कहते हैं। इस दिन भक्त भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। शाम को चांद निकलने के बाद व्रत तोड़ा जाता है। आज के दिन भगवान गणेश को शकलकंद का भोग लगाना व शकलकंद सेवन करने की भी परंपरा है। इस व्रत को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश के ज्यादातर इलाकों में किया जाता है।
संकट चौथ व्रत का महत्व
संकष्टी चतुर्थी या संकट चौथ का व्रत संतान की लंबी उम्र व खुशहाल जीवन के लिए रखा जाता है साथ ही इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माना जाता है कि सकट चौथ का व्रत व इस दिन लंबोदर की पूजा से सारे संकट दूर हो जाते हैं और संतान की दीर्घायु और सुखद जीवन का वरदान प्राप्त होता है। संकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंडी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत वैसे तो हर महीने में दो बार होता है लेकिन माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी की महिमा सबसे ज्यादा है।
चंद्रमा निकले का समय आज
दिल्ली में आज चांद 10:34PM पर निकलेगा। वहीं अन्य इलाकों में चांद निकलने के समय में कुछ अंतर हो सकता है।
कष्टी चतु्र्थी व्रत कथा-
एक बार मां पार्वती स्नान के लिए गईं तो उन्होंने द्वार पर भगवान गणेश को खड़ा कर दिया और कहा कोई अंदर न आ पाए। लेकिन तभी कुछ देर बाद भगवान शिव वहां पहुंच गए तो गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। पुत्र गणेश का यह हाल देखकर मां पार्वती बहुत दु,खी हुईं और शिव जी से अपने पुत्र को जीवित करने का हठ करने लगीं।

जब मां पार्वती ने शिव से बहुत अनुरोध किया तो भगवान गणेश को हाथी का सिर लगाकर दूसरा जीवन दिया गया। तब से उनका नाम गजमुख , गजानन हुआ। इसी दिन से भगवान गणपति को प्रथम पूज्य होने का गौरव भी हासिल हुआ और उन्हें वरदान मिला कि जो भी भक्त या देवता आपकी पूजा व व्रत करेगा उनके सारे संकटों का हरण होगा और मनोकामना पूरी होगी। 
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