नई दिल्ली। पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज को हिंदू विरोधी कहे जाने पर गीतकार जावेद अख्तर ऐतराज जाहिर किया है। जावेद अख्तर ने गुरुवार को कहा कि यह बेतुका और हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि फैज ने यह नज्म पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जिया उल हक की सरकार के खिलाफ लिखी थी।
दरअसल, आईआईटी कानपुर के छात्रों ने दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन में छात्रों पर लाठीचार्ज का विरोध किया था। छात्रों ने फैज की नज्म "हम भी देखेंगे' पढ़ी थी। आईआईटी की एक फैकलटी ने इस नज्म के कुछ हिस्सों को हिंदू विरोधी कहा था, जिसके बाद शिक्षण संस्थान ने जांच का फैसला किया है।
पाकिस्तान की कट्टरपंथी सरकार के विरोध में लिखी थी फैज ने नज्म- अख्तर
जावेद अख्तर ने कहा- फैज ने अपना आधा जीवन पाकिस्तान के बाहर बिताया और उन्हें पाकिस्तान विरोधी कहा गया। उनकी लिखी नज्म की जांच कराने का निर्णय बेतुका है। इस मुद्दे पर बात करना भी कठिन है, क्योंकि इसका किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह नज्म सांप्रदायिक और कट्टरपंथी सरकार के खिलाफ लिखी थी।
1979 में फैज ने लिखी थी ये नज्म
सत्ता से विरोध के चलते फैज कई साल जेल में भी रहे। उन्होंने 1979 में पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जिया उल हक के सैनिक शासन के विरोध में यह नज्म लिखी थी। इसमें 'बस नाम रहेगा अल्लाह का' पंक्ति को लेकर विवाद है। आईआईटी के उपनिदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने इसके बारे में यूनिवर्सिटी से शिकायत की थी।
