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सिंधिया को मिलने के लिए समय न देने की बात पर राहुल ने कहा- वे इकलौते व्यक्ति हैं, जो मेरे घर कभी भी आ सकते हैं


नई दिल्ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिलने के लिए राहुल और सोनिया गांधी द्वारा टाइम न दिए जाने के मामले में राहुल ने बुधवार को कहा- पार्टी में वे इकलौते व्यक्ति हैं जो मेरे घर कभी भी आ सकते हैं। इससे पहले सिंधिया के इस्तीफे के करीब 24 घंटे बाद राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि जब आप (मोदी सरकार) कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने में व्यस्त हैं, तब यह देखने में चूक गए कि दुनिया में तेल की कीमतों में 35% की गिरावट आई है। क्या आप पेट्रोल की कीमतों को 60 रुपए प्रति लीटर कर देश के लोगों को राहत दे सकते हैं? इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
‘कांग्रेस ने कई अहम पद दिए, फिर भी वे मोदी-शाह की शरण में चले गए’
ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफा पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि पार्टी ने उन्हें  सांसद, मंत्री और राष्ट्रीय महासचिव जैसे कई अहम पद दिए, फिर भी वे मोदी-शाह की शरण में चले गए। सिंधिया ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कांग्रेस से नाता तोड़ दिया था। उनके इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश के 22 विधायकों ने भी मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। 
1957 तक सिंधिया परिवार हिंदू महासभा के साथ था: दिग्विजय
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को सिंधिया को लेकर ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, 'उनका (सिंधिया) परिवार 1957 तक हिंदू महासभा के साथ था। तात्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दिवंगत राजमाता विजयाराजे सिंधिया को कांग्रेस में शामिल किया। इसके बाद 1957 और 1962 में वे सांसद बनीं। उन्होंने 1967 में कांग्रेस छोड़ दिया था।
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा- महात्मा गांधी को मारने के लिए नाथूराम गोडसे ने जिस रिवाल्वर का इस्तेमाल किया था, उसे ग्वालियर के परचुरे ने ही दी थी। दिग्विजय ने ट्वीट में जिन परचुरे का नाम लिया है उनका पूरा नाम डॉ. डीएस परचुरे था, वो ग्वालियर में एक हिंदू संगठन के प्रमुख थे।
नहीं लगता कि उन्हें भाजपा में कांग्रेस जैसा सम्मान मिलेगा: खुर्शीद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, ‘‘पार्टी से इतना सम्मान मिलने के बाद सिंधिया को थोड़ी सब्र करनी चाहिए थी। यह पहली बार नहीं है जब पार्टी संकट में आई है, लोग डूबते जहाज को छोड़ देते हैं, वक्त अच्छा नहीं होने पर दोस्त भी छोड़ देते हैं। जब समय बदल जाता है तो वे वापस लौट आते हैं। मुझे यकीन है कि हमारी पार्टी ने सिंधियाजी को सम्मान और पहचान दी है। उनके पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अच्छे संबंध रहे। उनका पार्टी छोड़ने का निर्णय दुखी करने वाला है। मुझे नहीं लगता कि उन्हें भाजपा में ऐसा सम्मान और पहचान मिलेगी।’’ 
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