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राहुल-ज्योतिरादित्य संसद में अगल-बगल बैठते थे, एक रंग की जैकेट पहनते थे; मोदी के भाषण के दौरान राहुल ने सिंधिया की तरफ देखकर ही आंख मारी थी


नई दिल्ली। 'मेरी जीत, तेरी जीत, तेरी हार, मेरी हार। सुन ऐ मेरे यार, तेरा गम, मेरा गम।' यह लाइनें राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की दोस्ती के लिए बोली जाती थीं, लेकिन आज दोनों की 16 साल पुरानी दोस्ती टूट गई। यह दोस्ती अक्सर कई मंचों पर देखने को मिली। संसद से सड़क तक, रणनीति से लेकर रैली तक ज्योतिरादित्य हमेशा राहुल गांधी के साये की तरह साथ रहते थे। राहुल संसद में ज्योतिरादित्य की बगल वाली सीट पर ही बैठते थे। दिसंबर 2017 में जब राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने तो उन्होंने मध्य प्रदेश में सिंधिया को चुनावी बागडोर सौंपी। जुलाई 2018 में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने अपने मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ देखकर ही आंख मारी थी। इस घटना की जमकर चर्चा हुई थी। दोस्ती के दम पर ही राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य को मनाकर कमलनाथ को सीएम बनवाया था। राहुल और ज्योतिरादित्य की बीच दोस्ती 2004 में हुई थी, जब दोनों लोकसभा में चुनकर पहुंचे थे। ज्योतिरादित्य को गांधी परिवार को राहुल, प्रियंका और वाड्रा के बाद चौथा सदस्य कहा जाता था।

18 दिसंबर 2018: संसद के बाहर मीडिया ने राहुल गांधी से कर्ज माफी को लेकर सवाल पूछा। राहुल गांधी थोड़ी देर ठिठके तो सिंधिया ने उन्हें पीछे से बताया कि क्या बोलना है। सिंधिया ने राहुल ने कहा कि आप बोलिए- हमने वो करने दिखाया जो मोदीजी नहीं कर पाए। किसानों का कर्ज माफ कर दिया गया है।
राहुल कई बार तो सिंधिया से बात कर मीडिया को जवाब देते थे।
11 जुलाई 2019: सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस संकट में है। हमें इसकी मजबूती के लिए साथ मिलकर काम करना होगा। राहुल गांधी के निर्णय (अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद) के बाद के फिर एक ऊर्जावान नेता की जरूरत है। 
संसद में राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया अगल-बगल की सीट पर ही बैठते थे। 
26 फरवरी 2016: ज्योतिरादित्य सिंधिया संसद में राहुल वेमुला की हत्या को लेकर बोल रहे थे। राहुल लगातार ज्योतिरादित्य को ही देख रहे थे। यह वीडियो मीडिया में काफी चर्चित हुआ था। 
जनवरी, 2019: राहुल ने कहा- ज्योतिरादित्य सिंधिया बहुत प्रतिभाशाली युवा नेता हैं, वह यूपी में शानदार काम करेंगे। 
इस तरह शुरू हुआ दोस्ती का सफर
ज्योतिरादित्य सिंधिया 2001 में कांग्रेस में शामिल हुए। फरवरी 2002 में उन्होंने अपने पिता माधवराव सिंधिया के देहांत के बाद उन्हीं की खाली हुई सीट गुना से लोकसभा का उपचुनाव लड़ा। ज्योतिरादित्य ने 4.50 लाख वोटों से जीत दर्ज की। राहुल 2004 में पहली बार सांसद बने। ज्योतिरादित्य भी 2004 का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। यहीं से दोनों की दोस्ती का दौर शुरू हुआ। 2007 में राहुल गांधी नेशनल यूथ कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए। 2007 में राहुल के कहने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मनमोहन कैबिनेट में जगह मिली। 2009 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया राहुल गांधी के साथ स्टार कैंपेनर रहे। 
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