नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए कोर्ट परिसर में सभी वकीलों के चेंबर अलगे आदेश तक बंद रहेंगे। साथ ही कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी पर अगले आदेश तक रोक रहेगी। केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जरूरी मामलों की सुनवाई होगी।
वहीं, जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के मामले में शीर्ष अदालत ने सभी राज्य सरकारों को लॉ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का आदेश दिया है। यह कमेटी विचार करेगी कि किन अभियुक्तों को पेरोल या जमानत पर छोड़ा जा सकता है।
एनजीटी ने 31 मार्च तक अपनी सारी सुनवाई टाली
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 31 मार्च तक अपनी सारी सुनवाई टाल दी है। ट्रिब्यूनल ने सोमवार को जारी एक सर्कुलर में कहा कि कोरोनोवायरस के संक्रमण के मद्देनजर एनजीटी और जोनल बेंच के सभी मामले 31 मार्च तक रोक दिए गए हैं। 23-25 मार्च को होने वाले मामलों की सुनवाई अब 13 जुलाई को होगी और 26-27 मार्च को होने वाले मामलों की सुनवाई 14 जुलाई को होगी। इसके साथ ही जिन मामलों की सुनवाई 30-31 मार्च को होनी है उनकी सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
सीजेआई ने वर्चुअल कोर्ट शुरू करने के संकेत दिए थे
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोनावायरस के संकट के मद्देनजर पिछले दिनों एहतियाती कदम उठाने की बात कही थी। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने देश में वर्चुअल कोर्ट शुरू करने के संकेत दिए थे। सुप्रीम कोर्ट आने वाले वकीलों, पत्रकारों और फरियादियों की थर्मल स्क्रीनिंग पहले ही शुरू की जा चुकी है। वहीं, मुंबई और पटना हाईकोर्ट समेत कई अदालतें सुनवाई का वक्त कम कर चुकी हैं।
