भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के 5 लाख 75 हजार गैस पीड़ितों को कोरोनावायरस से संक्रमण का सबसे अधिक खतरा है। इंडियन कॉउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने अपनी रिपोर्ट में इसकी आशंका जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनावायरस का संक्रमण उन लोगों को ज्यादा होने के आसार हैं, जिन्हें कमजोर श्वसन तंत्र या फेफड़ों से जुड़ी समस्या रही हो। भोपाल गैस पीड़ितों में ज्यादातर को ऐसी ही समस्या है। इसका बड़ा सबूत करोना से शहर में हुई मौत का हिसाब भी है। भोपाल में कोरोना संक्रमण से अब तक छह लोगों की मौत हुई है। इनमें से पांच गैस पीड़ित थे। उनकी मेडिकल हिस्ट्री में कमजोर श्वसन तंत्र और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं थीं।
गैस पीड़ितों के लिए 30 साल से काम कर रहीं रचना ढींगरा ने बताया कि कोरोना से भोपाल में हो रही मौतों के बाद बुधवार को 500 गैस पीड़ितों के घर जाकर सैंपल लिए गए। हालांकि गैस पीड़ितों के कई बस्तियों में स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे शुरू ही नहीं किया है।
राजधानी में कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण अब तक एक संदिग्ध समेत छह लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन, किसी की भी न तो ट्रैवल हिस्ट्री है, न ही किसी पॉजिटिव संक्रमित व्यक्ति से सीधे संपर्क का कोई रिकाॅर्ड है। पुराने शहर से सामने आ रहे कोरोना के गंभीर मरीजों में संक्रमण का सोर्स का पता नहीं चल पाया है, यह स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना है। कोरोना के कारण मौत वाले सभी मामले पुराने शहर की घनी आबादी वाले जहांगीराबाद, इब्राहिमगंज और चौकी इमामबाड़ा इलाकों के हैं। इन्हीं इलाकों में जमातियों का मूवमेंट भी रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सभी मरने वाले उम्रदराज हैं, जिनकी औसत उम्र 60 वर्ष है। ज्यादातर मामलों में गंभीर स्थिति में ही मरीज को अस्पताल लाया गया था। एक बात और कॉमन है कि सभी को पहले से ही अस्थमा, ट्यूबर क्यूलोसिस और कैंसर जैसी बीमारियां थीं। ज्यादातर मरने वालों के गैस पीड़ित होने की जानकारी भी सामने आई है।
जहांगीराबाद पर सबसे अधिक फोकस
कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए प्रशासन द्वारा जहांगीराबाद में जो कवायद की जा रही है, वह पांच गैस पीड़ितों की मौत के बाद ही शुरू की गई है। जहांगीराबाद में नगर निगम के दो वार्ड हैं। बाकी 43 वार्ड में अभी सैंपल या सर्वे शुरू नहीं किया गया है। दरअसल दिसंबर 1984 में जब भोपाल में गैस त्रासदी हुई थी, उस वक्त प्रभावित वार्डों की संख्या 36 थीं। नए परिसीमन में ये संख्या 45 हो गई हैं।
गैस पीड़ितों की सबसे ज्यादा संख्या जेपी नगर, फूटा मकबरा, काजी कैंप, डीआईजी बंगला, लक्ष्मी टॉकीज, शाहजहांनाबाद, करोद, रेलवे स्टेशन, चांदबड़, सेमरा सहित करीब दो दर्जन बस्तियों में है। यहां पर अब तक सक्रीनिंग का काम भी शुरू नहीं हुआ है।
गैस पीड़ितों का इलाज बंद
भोपाल में गैस पीड़ितों की संख्या 5 लाख 75 हजार के करीब है। इनमें से 3 लाख 50 हजार अकेले बीएमएचआरसी में रजिस्टर्ड हैं। रचना ढींगरा बताती हैं कि गैस पीड़ितों का बीएमएचआरसी में इलाज बंद हो चुका है। दूसरे अस्पतालों में ओपीडी बंद हैं। बीएमएचआरसी में गैस पीड़ित सिर्फ अपना कार्ड लेकर जाते थे। उनके पास खुद की मेडिकल हिस्ट्री का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अब अगर गैस पीड़ित जैसे-तैसे किसी डॉक्टर के पास जाते भी हैं, तो मेडिकल हिस्ट्री के अभाव में उनकी जांच और इलाज में दिक्कत हो रही है। जिन गैस पीड़ितों की मौत कोरोना के संक्रमण से हुई है, उनके सैंपल भी मौत के बाद लिए गए हैं।
हमीदिया के श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र दवे बताते हैं कि भोपाल गैस पीड़ितों को कई तरह की बीमारियां हैं। जिन्हें कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा है, वैसे लक्षण सभी गैस पीड़ितों में मौजूद हैं। संक्रमण से बचने के लिए उन्हें ज्यादा अलर्ट और क्वारैंटाइन रहने की जरूरत है। जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षण दिखते ही उन्हें बिना लापरवाही के डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए।
चिकित्सकों की सलाह- लापरवाही बिलकुल नहीं बरते, तुरंत अस्पताल जाएं
- गैस पीड़ित ये न सोचें कि लॉकडाउन की वजह से बाहर नहीं जा सकते। जरा भी परेशानी होने पर अपने नजदीकी अस्पताल जाएं।
- समूह में बैठना और घूमना-फिरना बिलकुल बंद कर दें। परिवार में भी दूरी बनाकर रखें।
- खुद का परीक्षण स्वयं करते रहें। जरा सी परेशानी होने पर डॉक्टर और हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।
- जो दवाएं पहले से चल रही हैं, उन्हें लेते रहें, परेशानी होने पर अपने आप कोई दवाई न लें। डॉक्टर से मिलें।
- अगर बीते दिनों किसी ऐसी जगह गए हों जहां संक्रमित मरीज मिला है, इसकी जानकारी तुरंत हेल्प लाइन को दें।
- जिस डॉक्टर से पहले से इलाज चल रहा है, उनसे फोन या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बातचीत कर अपने बारे में बताएं।
