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श्रमिक धैर्य रखें, सबको पहुँचाया जायेगा

भोपाल। मध्यप्रदेश के लिये श्रमिकों को उनके स्थान तक पहुँचाने की चुनौती अन्य राज्यों की तुलना में थोड़ा अधिक है। एक ओर अन्य प्रदेशों में फँसे मध्यप्रदेश के श्रमिकों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुँचाना है, तो दूसरी ओर दूसरे प्रदेशों के श्रमिकों को जो मध्यप्रदेश से ट्रांजिट कर रहे हैं, उन्हे उनके राज्यों की सीमा तक पहुँचाना है। देश का हृदयप्रदेश होने के कारण महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान आदि राज्यों से उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड जाने वाले श्रमिक मध्यप्रदेश होकर गुजर रहे हैं। यह श्रमिक पैदल यात्रा अथवा अन्य साधनों से मध्यप्रदेश की सीमा पर पहुँचते हैं। सबसे अधिक दबाब सेंधवा की सीमा पर बिजासन घाट पर है। वहां प्रतिदिन 5 से 6 हजार मजदूर पहुँच रहे हैं। इन श्रमिकों को भोजन, चिकित्सा परीक्षण के बाद नि:शुल्क बसों के माध्यम से देवास ट्रांजिट पर पहुँचाया जा रहा है। वहां से सागर, छतरपुर, गुना और शिवपुरी बसों से पहुँचाया जाता है। इन स्थानों से प्रदेश के दूसरे जिलो के श्रमिकों को उनके जिले में और उत्तरप्रदेश, झारखण्ड तथा बिहार के श्रमिकों को उत्तरप्रदेश की सीमा तक पहुँचाया जा रहा है।

सेंधवा सीमा पर पिछले तीन दिनों में लगभग 15 हजार श्रमिकों को भोजन करवा कर उन्हें बसों के माध्यम से देवास होते हुए उनके गंतव्य की ओर भेजा गया है। श्रमिकों की संख्या काफी अधिक होने से बसों की संख्या और फेरे बढ़ाने की सतत कोशिशें की जा रही हैं।

श्रमिकों मे अपील की है कि वे धैर्य रखें। उनको भोजन और चिकित्सा जांच के उपरांत बसों में नि:शुल्क पहुंचाया जाएगा। संकट की इस घड़ी में घबराये नहीं, मध्यप्रदेश सरकार एक-एक श्रमिक को घर पहुँचाएगी। मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलो में श्रमिकों के लिये भोजन, अस्थायी ठहरने, चिकित्सा जांच और बसों की व्यवस्था की गयी है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक आने वाले सभी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचा नहीं दिया जाएगा। 

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