जल संसाधन विभाग में 877 करोड़ रुपए के एडवांस पेमेंट की ईओडब्ल्यू ने शुरु की जांच
भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी के खिलाफ महीनेभर में ही ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग) द्वारा एफआईआर दर्ज करने के पुख्ता आसार हैं। रेड्डी के खिलाफ अपर मुख्य सचिव रहते जल संसाधन विभाग में ठेकों की शर्तें बदलवाकर 877 करोड़ रुपए के एडवांस पेमेंट मामले में विभागीय जांच के आधार पर ईओडब्ल्यू ने पीई दर्ज करके तेजी से जांच शुरू कर दी है।
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| एम गोपाल रेड्डी |
आरोप है कि जल संसाधन विभाग में टेंडर और वर्क आॅर्डर जारी हो जाने के बाद शर्तों में बदलाव करके तत्कालीन अपर मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी ने 877 करोड़ रुपए का एडवांस पेमेंट करवा दिया था। इस मामले में प्रदेश में कांग्रेस सरकार के गिरने के बाद हंगामा मचना शुरू हुआ, जिसके चलते विधानसभा तक में यह मामला उठा। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा था कि कोई भी कितना बड़ा क्यों न हो, उसके खिलाफ जांच होकर कार्रवाई होगी। इसके बाद ही जल संसाधन विभागीय कमेटी ने इस मामले की जांच की और पाया कि नियमों को तोड़ा-मरोड़ गया। जिन 3 बांधों के निर्माण के लिए एडवासं पेमेंट करवाया गया, उनके लिए भूमि अधिग्रहण तक नही हो सका था। यह रिपोर्ट जलसंसाधन विभाग की ओर से ईओडब्ल्यू को सौंपी गई, जिसका प्राथमिक स्तर पर परीक्षण करके बीते 2 जून को पीई दर्ज की गई। खास बात यह भी कि इस मामले में जलसंसाधन विभाग ने जांच रिपोर्ट के साथ ही कार्रवाई की परमिशन भी दे दी है। ऐसे में ईओडब्ल्यू जाचं के बाद सीधे एफआईआर दर्ज कर सकेगा।
सीधी बात
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| अजय शर्मा |
अजय शर्मा, महानिदेशक, आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो
-क्या पूर्व सीएस के मामले में जांच शुरू कर दी गई है?
-हां, जल संसाधन विभाग ने इस मामले की प्राथमिक जांच के बाद गड़बड़ी पाई है। यही जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री की घोषणा के पालन में जल संसाधन विभाग ने ईओडब्ल्यू को आगे की जांच एवं कार्रवाई की परमिशन सहित सौंपी है। इसके बाद बीते 2 जून को इस मामले में पीई दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है।
क्या पीई में गड़बड़ी के तथ्यों की पुष्टि हुई है?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। फिर भी कोशिश है कि एक महीने के अंदर-अंदर जांच पूरी करके नतीजों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई हो सके।


