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गुना में जिस लोमहर्षक घटना को अंजाम दिया गया है वैसी अभी तक सिर्फ नक्सली और आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में देखने सुनने मिली हैं।

भोपाल। सूत्रों का कहना है कि आरोन क्षेत्र के जंगलों में अक्सर शिकारियों की आमद होती है। ऐसे ही शिकार की सूचना पर आरोन थाना पुलिस शिकारियों को पकड़ने एंबुश लगाए थी। पुलिस को कल्पना नहीं थी कि बदमाश उन पर सीधी गोली चला देंगे। जैसे ही बाइक सवार बदमाशों का पुलिस से आमना सामना हुआ गोलियों की तड़तड़ाहट भी शुरू हो गई। जब यह गोलीबारी बंद हुई तब वहां पुलिस कर्मियों के शव बिखरे पड़े थे जबकि अपराधी/शिकारी भाग चुके थे। अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक आरोपियों में से एक ग्राम बिदुरिया निवासी नौशाद की भी पुलिस की गोली से मौत हुई है। जिसे उसके साथी मौके से उठा ले गए।

खबर मिली है कि घटनास्थल से बदमाशों द्वारा चलाई गई 12 बोर की बंदूक से चले हुए खाली 07 राउंड मिले हैं, और एक जिंदा राउंड भी मिला है। वही सब इंस्पेक्टर द्वारा चलाई गई 9MM की पिस्टल से 10 राउंड चले हुए घटनास्थल पर मिले हैं। इंस्पेक्टर की पिस्टल भी शव के पास पड़ी हुई मिली है। घटनास्थल के पास ही आरक्षक, प्रधान आरक्षक और सब इंस्पेक्टर के शव पाए गए हैं। 

घटनाक्रम जिस जगह पर हुआ वहीं पास में बदमाशों द्वारा छोड़े गए 3-4 हिरण भी मृत अवस्था में बोरे में बंद मिले हैं। जिसमें कुछ हिरणों के धड़ कुछ बोरे में और कुछ हिरण के सिंग सहित सिर अलग - अलग बोरे में बंद मिले हैं। एक बोरे में मृत मोर भी पाया गया है।

इस मुठभेड़ में आरोन थाने के एसआई राजकुमार जाटव, प्रधान आरक्षक नीरज भार्गव, सिपाही संतराम मीणा शहीद हुए हैं। जबकि प्रायवेट आदमी लखन गिरी जो रात को गश्त के दौरान पुलिस जीप चला रहा था उसे गोली लगी है। 

इस घटना से प्रदेश भर में खलबली मच गई है। जंगलों की सुरक्षा और शिकार रोकने के लिए तैनात फॉरेस्ट विभाग के अमले के होते हुए भी बिना फॉरेस्ट गार्ड्स को लिए पुलिस की टीम का जाना भी सवालों के घेरे में है। वारदात में किसी बड़े नेक्सस के शामिल होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। वहीं बदमाशों के बुलंद हौसलों ने आम जनता को सोचने पर विवश कर दिया है। अपराधी कौन है अभी तक इस बारे में अधिकृत तौर पर कुछ पता नहीं चल सका है।