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नेशनल लोक अदालत में 10 हजार से ज्यादा मामले निपटे, एक्सीडेंट के मामले में 82 लाख का अवॉर्ड पारित

भोपाल।  इस साल की आखिरी नेशनल लोक अदालत में 10 हजार 231 मामलों का आपसी सहमति से निराकरण करके 41,66,51,254 रुपए का अवार्ड पारित किया गया। वहीं एक्सीडेंट के एक मामले में मृतक के परिवार को रिकॉर्ड 82 लाख रुपए का अवार्ड पारित किया गया। 

जिला न्यायालय में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने दीप प्रज्जवलन करके किया। इस मौके पर स्टेट बार काउंसिल अध्यक्ष विजय चौधरी, भोपाल बार अध्यक्ष पदमचंद्र कोठारी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला न्यायाधीश एसपीएस बुंदेला, नेशनल लोक अदालत प्रभारी जिला न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार टाडा, जेएमएफसी नितिन तोमर, जिला विधिक सहायता अधिकारी अभय सिंह, बार प्रवक्ता खालिद हफीज, राजेश नारायण श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।  नेशनल लोक अदालत में मामलों के तीव्र और सुचारू निराकरण के लिए जिला कोर्ट में 48, फेमिली कोर्ट में 4, सिविल कोर्ट बैरसिया में 5, श्रम न्यायालय में 3 और परिवार परामर्श केंद्र में 1 खंडपीठ का गठन किया गया था। इनके समक्ष लंबित रेफर्ड केस 25084 और प्री लिटीगेशन रेफर्ड केस 25854 को निराकरण के लिए प्रस्तुत किया गया।  इनमें से कुल 10231 मामले निराकृत किए गए, जिनमें निराकृत लंबित 2520 केस, निराकृत प्रिलिटीगेशन केस 7711, चेक बांउस के 768, एक्सीडेंट क्लेम 317, आपराधिक राजानामा वाले मामले 776, फेमिली केस 128, बैंक रिकवरी 650, सिविल केस 328, बिजली मामले 788, श्रम विभाग 18, ट्रैफिक 1771, जलकर संपत्तिकर 4649 का निराकरण किया गया।  

कैदियों का स्टॉल आकर्षण का केंद्र

लोक अदालत में सेंट्रल जेल भोपाल के कैदियों द्वारा तैयार की गई सामग्री का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा। यह स्टॉल जिला न्यायालय के प्रवेश द्वार वाले हॉल में लगाया गया था। 

82 लाख का मुआवजा मंजूर 

नेशनल लोक अदालत में न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने  मोटरयान अधिनियम के अन्तर्गत भोपाल निवासी एक मृतक थाना बिलखिरिया के मामले में 82 लाख रुपए का अवार्ड पारित किया। मृतक को  कर्तव्य स्थल की ओर जाते समय क्रेटा चालक ने टक्कर मार दी थी। इस मामले में बीमा कंपनी ने घर के एकमात्र आय अर्जन करने वाले व्यक्ति के निधन के बाद उनकी पनी और दो अवयस्क पुत्रियों के लिए 82 लाख रुपए का दावा समझौता पेश किया। इस पर न्यायाधीश की समझाइश के बाद मृतक के परिवार ने स्वीकार कर लिया।