Type Here to Get Search Results !

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्रियों ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया

मप्र कांग्रेस प्रवक्ता की याचिका पर भोपाल कोर्ट का फैसला

भोपाल। मप्र कांग्रेस प्रवक्ता अमिताभ अग्निहोत्री ने जारी बयान में बताया है कि मुख्यमंत्री, मंत्रि परिषद ओर अधिकारियों द्वारा चुनाव में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन मामले में भोपाल जिला कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि आदर्श आचार संहिता का पालन किया जाना बाध्यकारी है। 

अग्निहोत्री के अनुसार तेईसवें जिला अपर सत्र न्यायाधीष भोपाल अतुल सक्सेना ने अपने फैसले में कहा है कि आदर्श आचरण संहिता का पालन किया जाना शासन-प्रशान के लिए बाध्यकारी है और उसके क्रियान्वयन पर संबंधित व्यक्ति की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। समस्त चुनाव के निष्पादन पारदर्शाी आयोजन हेतु परिणाम प्राप्ति हेतु आदर्श आचार संहिता का अवलंब लिया जाए। इस निर्देश के साथ ही कोर्ट ने प्रकरण समाप्त कर दिया। 

यह है याचिका

नगरीय निकाय और पंचायत के निर्वाचन 2014-15 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मंत्रि परिषद, मुख्य सचिव द्वारा आदर्श आचार संहिता की शिकायतें 28 जनवरी 2015 और 10 फरवरी 2015 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को की गई थीं। इन पर कार्रवाई नही होने पर भोपाल कोर्ट में याचिका पेश की गई। इसमें आचार संहिता प्रभावी होने के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रोड शो किया और घोषणा की थी कि  2400 वर्गफिट भूखण्ड पर मकान बनाने के लिए नगर निगम की परमिशन की जरूरत नहीं होगी। आचार संहिताकाल में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 6-1-2015 को मंत्री परिषद की बैठक में महिला मतदाताओं को प्रभावित करने निर्णय लिया गया कि ग्रामीण क्षेत्र एवं नगरीय क्षेत्रों में एक तिहाई उचित मूल्य की दुकानें महिलाओं को आवंटित की जावेंगी। यह भी निर्णय लिया गया कि नवाचार पर आधारित नई उद्यमिता विकसित करने अंशपूंजी की पूर्ति के लिए वेंचर केपिटल फण्ड की व्यवस्था की जाएगी। वित्त निगम द्वारा चुकायी जाने वाली गारण्टी फीस के भुगतान के बराबर अतिरिक्त राशि पूंजी के रूप में निगम को देने का निर्णय किया। मुख्यमंत्री ने आदर्श आचार संहिता को तोड़ते हुए रोड शो में घोषणा की कि भाजपा को जितायें, 15 गुना बढ़ जायेगी विकास की रफ्तार, अवैध कॉलोनियों को वैध करने, यहां सड़कों, सीवेज लाईन, नलों की व्यवस्था की जावेगी।