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मंडी प्रशासन के अड़ंगे के चलते भोपाल के किसान धान बेचने जा रहे पड़ोसी जिलों में

व्यापारियों की प्रतिभूति 30 लाख से बढ़ाकर 50 लाख करने का दबाव

भोपाल। कृषि मंडियों को किसानों की मदद के लिए बनाया गया है, लेकिन राजधानी भोपाल की कृषि मंडी करोद का प्रशासन अडियल और हठधर्मी होने से धान की खरीदी नही हो पा रही है। आलम यह है कि राजधानी की करोद मंडी में धान खरीदी नहीं होने से जिले के किसान धान बेचने रायसेन, मंडीदीप, बैरसिया से लेकर विदिशा की मंडी जा रहे हैं। जहां दो से तीन दिन कड़ाके की ठंड में इंतजार करने के बाद धान की तुलाई हो पाती है। 

धान खरीदी नहीं होने को लेकर भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष किसान सुरेश पाटीदार का कहना है कि ठंड में किसान आसपास की मंडियों में जाने को मजबूर हैं। बाहरी किसान होने से दूसरी मंडियों में किसानों को दो से तीन दिन इंतजार करना पड़ता है, जिसके बाद तुलाई होकर पेमेंट भी करीब हफ्तेभर बाद मिल रहा है। दूसरे किसान देवेंद्र सिंह दांगी का कहना है कि इस बार धान का भाव 3200 रुपए क्विंटल से बढ़कर 4500 रुपए क्विंटल हो गया है, लेकिन भोपाल की करोद मंडी में खरीदी नहीं होने से फालतू का खर्चा किसानों को दूसरी मंडियों तक आने जाने पर करना पड़ रहा है। दूसरी ओर,  व्यापारियों का कहना है कि मंडी सचिव ने पहले 30 लाख फिर 50 लाख रुपए की जमानत राशि जमा कराने पर ही खरीदी की अनुमति देने का कहा है, जबकि कुछ ही व्यापारी धान खरीदी करते हैं। ऐसे में इतनी ज्यादा राशि जमा नहीं करवा सकते। वैसे भी किसानों को तत्काल पेमेंट होता है, उसके बाद ही खरीदा गया सामान मंडी के बाहर ले जा सकते हैं। 

धान खरीदी का उसी दिन फुल पेमेंट किसान को करते हैं, जिसको गेट से धान की गाड़ी निकलने से पहले चेक किया जा सकता है। फिर भी मंडी सचिव ने खरीदी से पहले ही 50 लाख रुपए की प्रतिभूति की शर्त लगा दी, जिससे खरीदी नहीं हो सकी। 

                   हरीश ज्ञानचंदानी, अध्यक्ष, ग्रेन एंड आइॅल सीड्स मर्चेंटस एसोसिएशन

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