बेगमगंज। राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले, अद्भुत शौर्य एवं अदम्य साहस के प्रतीक, परम प्रतापी योद्धा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर बस स्टैंड स्थित उनकी प्रतिमा पर नपा अध्यक्ष संदीप लोधी एसडीएम अभिषेक चौरसिया अनेकों गणमान्य नागरिकों ने मोमबत्ती जलाकर श्रद्धा सुमन अर्पित कर मातृभूमि के लिए उनके त्याग और समर्पण को शिद्दत के साथ याद किया गया।
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| महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर मोमबत्ती जलाते हुए |
इस अवसर पर नपाध्यक्ष संदीप लोधी ने कहां कि महाराणा प्रताप ऐसे वीर थे कि दुश्मन भी उनके युद्ध-कौशल के कायल थे। जब उनकी मृत्यु हुई थी तो कहा जाता है कि अकबर की आंखें भी नम हो गई थीं। महाराणा प्रताप 208 किलो का वजन लेकर लड़ते थे। उनका भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। युद्ध में उनके पास दो तलवार रहती थीं। इन सभी का वजन 208 किलो होता था।
एडवोकेट राजेंद्र सोलंकी ने कहा कि
सोलहवीं शताब्दी के राजपूत शासकों में महाराणा प्रताप ऐसे शासक थे, जो अकबर को लगातार टक्कर देते रहे। जब भी शौर्य और बलिदान की बात आती है तो महाराणा प्रताप का नाम शान से लिया जाता है।
एडवोकेट गजेंद्र ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा की महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था। इस युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ बीस हजार सैनिक थे और अकबर के पास 85 हजार सैनिक। इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी। महाराणा प्रताप आज हर भारतीय के दिल में अमर हैं।
डॉ जितेंद्र तोमर ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप का प्रिय घोड़ा चेतक था और हल्दी घाटी का युद्ध एक तरह से चेतक ने भी लड़ा। जब मुगल सेना महाराणा प्रताप के पीछे लगे थी, तब चेतक प्रताप को अपनी पीठ पर लिए 26 फीट के उस नाले को लांघ गया, जिसे मुगल पार न कर सके। आज भी चित्तौड़ की हल्दी घाटी में चेतक की समाधि बनी हुई है।
इस अवसर पर उक्त के अलावा विक्रम सिंह जादूगर, राजेंद्र सिंह फौजी, सुखबीर सिंह ठाकुर, बृजेश लोधी, पत्रकार शानू रैकवार श्री तोमर सहित अनेकों समाज बंधु उपस्थित थे

