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शहनाइयों की गूंज के बीच थम गई जिंदगी, 4 हजार लोगों के भोज से पहले बिछ गया मातम

  • भवानीमंडी के पिपलिया गांव में भतीजे-भतीजी की शादी में खुशी से झूम रहे चाचा ने ली अंतिम सांस

भवानीमंडी  ( जगदीश पोरवाल )।     थाना क्षेत्र के पिपलिया गांव से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। जिस आंगन में शहनाइयों की मधुर धुन गूंज रही थी, जहां खुशियों के रंग बिखरे हुए थे और दुल्हन की डोली सजाने की तैयारियां चल रही थीं, उसी घर में पल भर में मातम छा गया। शादी की खुशियां अचानक आंसुओं में बदल गईं।


गांव पिपलिया में भैरुलाल के पुत्र मनोज और पुत्री प्रियंका की शादी की बुधवार देर रात निकासी (बिंदौरी) का कार्यक्रम पूरे उत्साह के साथ निकाला जा रहा था। ढोल-नगाड़ों की थाप पर चाचा माणकचंद खुशी से झूम रहे थे।

भतीजे व भतीजी की शादी में चाचा ने दिल खोलकर नृत्य किया:-

चश्मदीदों के अनुसार चाचा माणक चंद ( 35 वर्ष ) ने भतीजे की शादी में बुधवार को रात बिंदोली में दिल खोलकर नृत्य किया, रिश्तेदारों पर खुशियों में पैसे भी लुटाए और हर किसी के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी। उन्हें देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि कुछ ही देर बाद यह खुशी हमेशा के लिए थम जाएगी।

इधर मेहमान विश्राम की तैयारी कर रहे थे उधर चाचा के अचानक सीने में तेज दर्द उठा:-

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब परिवार के लोग विश्राम की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक माणक चंद के सीने में तेज दर्द उठा। पहले तो परिजनों ने इसे सामान्य तकलीफ समझा, लेकिन हालत बिगड़ती देख तुरंत उन्हें झालावाड़ जिला अस्पताल ले जाया गया। दुर्भाग्यवश अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ बताया जा रहा है।

गुरुवार को सुबह होना था 4000 आदमियों का भोजन:-

गुरुवार सुबह जिस आंगन में हजारों लोगों की पंगत बैठनी थी, जहां हलवाई बड़े-बड़े कड़ाहों में पकवान बना रहे थे, वहीं अब सन्नाटा पसरा है। सजावट के बीच रोते-बिलखते परिजन और अधूरी रह गई तैयारियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है।

भतीजी की शुक्रवार को बारात आनी थी और भतीजे की शनिवार को बरात जानी थी:-

इस दुखद खबर के साथ ही पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। जहां शुक्रवार को कनवाड़ी से प्रियंका की बारात आनी थी और शनिवार को मनोज की बारात रवाना होनी थी, वहीं अब उसी घर में शोक की चादर बिछ गई है। रिश्तेदारों और गांववासियों की आंखें नम हैं। हर कोई यही कहता नजर आया कि माणक चंद ने अपनी आखिरी सांस भी अपनों की खुशियों के बीच ली।

पिपलिया चौकी प्रभारी जयदीप हाड़ा ने बताया कि शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया ।


गांव में हर जुबान पर एक ही बात है—

"जिसने सबकी खुशियों में रंग भरे, वही अपने भतीजे-भतीजी की शादी में खुशी-खुशी विदा हो गया…"

यह घटना न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए एक गहरा सदमा बन गई है।

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