- होनहार का भविष्य फाइलों में फंसा

भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल) । बीच में सिर्फ एक नाला है…लेकिन उसी नाले ने एक होनहार छात्र के सपनों के बीच ऐसी दीवार खड़ी कर दी है, जिसे दोनों राज्यों की सरकारें मिलकर भी नहीं तोड़ पा रही हैं।
भैसोदामंडी (मध्यप्रदेश) निवासी तनिष्क जैन ने JEE में 99.30% अंक हासिल किए।
10वीं बोर्ड में 93%।
मेहनत में अव्वल, प्रतिभा में आगे…
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में — किसी राज्य का नहीं।
दो राज्यों के बीच पिसती प्रतिभा
तनिष्क के पिता पारस जैन ने बताया कि उन्होंने दोनों राज्यों की योजनाओं में आवेदन किया। दोनों जगह से निराशा मिली।
राजस्थान सरकार ने कहा — जनाधार कार्ड लाओ।
मध्यप्रदेश सरकार ने कहा — 10वीं की MP मार्कशीट लाओ।
“हम मध्यप्रदेश में रहते हैं, इसलिए राजस्थान का जनाधार नहीं बन सकता।
पढ़ाई राजस्थान में की, इसलिए MP में मार्कशीट मान्य नहीं।
दोनों तरफ से दरवाजे बंद हैं… अब बेटे का हक किससे मांगें???– पारस जैन
सीमा सिर्फ कागजों में, जिंदगी में नहीं-
भैसोदामंडी और भवानीमंडी — दो राज्य, लेकिन एक जैसी बसावट।
सीमा के नाम पर सिर्फ एक नाला।
90% लोग रोजगार और शिक्षा के लिए भवानीमंडी पर निर्भर।
सस्ती जमीन के कारण लोग MP क्षेत्र में बस गए, लेकिन उनके बच्चों का भविष्य अब सरकारी शर्तों में उलझ गया है।
यह अकेला मामला नहीं-
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से दर्जनों छात्र इसी तकनीकी अड़चन के कारण योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
मामला जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में भी है, लेकिन समाधान शून्य।
मामला जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में भी है, लेकिन समाधान शून्य।
बड़ा सवाल: सीमा पर रहने वाले बच्चे क्या ‘नो मैन्स लैंड’ में हैं?
क्या प्रतिभा राज्य की सीमा देखकर जन्म लेती है?
क्या दो सरकारों के बीच समन्वय इतना कठिन है?
क्या नीतियों की खामियों के कारण सैकड़ों सपने हर साल कुचलते रहेंगे?
राजनीतिक जिम्मेदारी तय कब होगी?
दोनों राज्यों के जनप्रतिनिधि चुनाव के समय सीमा क्षेत्र में विकास के वादे करते हैं,
लेकिन जब योजनाओं का लाभ देने की बारी आती है, तो यही बच्चे कागजी शर्तों में फंस जाते हैं।
क्या दोनों राज्य सरकारें संयुक्त रूप से सीमा क्षेत्र के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान करेंगी?
या फिर नाले की यह लकीर आने वाले समय में और प्रतिभाओं को निगलती रहेगी?