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किसानो को विकसित तकनीकों से फसल अवशेषों के उपयोग को बढ़ावा देकर अतिरिक्त आय अर्जन के दिए गए टिप्स

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा फसल अवशेषों के उपयोग द्वारा बायोचार एवं ब्रिकेट उत्पादन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

भोपाल। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा फसल अवशेषों के उपयोग द्वारा बायोचार एवं ब्रिकेट उत्पादन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को किया गया।
 


इस कार्यक्रम के दौरान डॉ. सीआर मेहता, निदेशक, आईसीएआरझ्रसीआईएई, भोपाल ने किसानों का स्वागत करते हुए बताया कि संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से फसल अवशेषों का उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है तथा फसल अवशेषों को जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

डॉ. विनोद कुमार भार्गव, प्रधान अन्वेषक, कृषि एवं कृषि उद्योगों में ऊर्जा पर अभासअ परियोजना, ने फसल अवशेषों के उपयोग से संबंधित विकसित तकनीकों को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में उनके महत्व पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्रों में डॉ. संदीप गांगिल, प्रमुख, कृषि ऊर्जा एवं शक्ति प्रभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन का परिचय एवं महत्व विषय पर व्याख्यान दिया। इसके बाद डॉ. संदीप मंडल, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बायोचार उत्पादन तकनीक तथा इसके कृषि एवं मृदा सुधार में उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।


किसानों को जागरुक करके तकनीकों को बढ़ावा देना

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेषों के कुशल उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा बायोचार उत्पादन और बायोमास ब्रिकेटिंग जैसी सतत तकनीकों को बढ़ावा देना था। यह कार्यक्रम कृषि एवं कृषि उद्योगों में ऊर्जा पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (अकउफढ ङ्मल्ल एअअक) के एससीएसपी (रउरढ) गतिविधियों के अंतर्गत संस्थान के कृषि ऊर्जा एवं शक्ति प्रभाग ने आयोजित किया था। यह पहल आईसीएआर-सीआईएई, भोपाल द्वारा ग्रामीण समुदायों को क्षमता निर्माण एवं सतत कृषि अभियांत्रिकी तकनीकों के प्रसार के माध्यम से सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

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