- आरक्षण, भर्ती और शिक्षक हितों के लिए अपाक्स की प्रांतीय बैठक में रणनीति फाइनल करने के साथ ही जिलावार बैठकें करके सरकार को सबक सिखाने आंदोलन का लिया गया निर्णय
भोपाल। मध्यप्रदेश में आरक्षित वर्गों के साथ सरकार ही अनेदखी वाला बर्ताव कर रही है। आलम यह है कि सालों पुरानी जायज मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन देने से लेकर आंदोलन तक हो चुके हैं, बावजूद सुनवाई नही हो रही है। इससे प्रदेशभर के कर्मचारियों अधिकारियों में सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब प्रदेशव्यापी आंदोलन खड़ा होगा, जिसकी शुरुआत जिलों में प्रदर्शन, रैली और जिला मुख्यालयों में ज्ञापन सौंपने से होगी।

यह अल्टीमेटम अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी संगठन (अपाक्स) के प्रांताध्यक्ष कृष्णपाल सिंह यादव ने अपाक्स की शनिवार को भोपाल में हुई प्रांतीय बैठक में दिया। यादव ने कहा कि आरक्षित वर्गों के लिए सामाजिक न्याय की दिशा में सटीक और प्रभावी कदम उठाने की जरुरत है। नियमित रोजगार के लिए नियमित भर्ती सहित प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण लागू किया जाए। इसके लिए सरकार को कडे कानून बनाने की जरुरत है, ताकि प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लागू किया जा सके।
मांगों और न्याय के लिए प्रदेशव्यापी संघर्ष जारी रहेगा: पटेल
प्रांतीय बैठक में शामिल नगर निगम भोपाल के वरिष्ठ कर्मचारी नेता सुरसरी प्रसाद पटेल ने बताया कि संगठन ने कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखीं और संकल्प लिया कि इन मुद्दों पर लगातार संघर्ष जारी रहेगा। यह बैठक आरक्षित वर्गों के अधिकारों, नियमित रोजगार और सामाजिक न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुई। पटेल ने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, संघर्ष जारी रहेगा।
इन्होंने किया बैठक को संबोधित और सरकार को चेताया
बैठक के मुख्य अतिथि अपाक्स के संरक्षक इंजी. भुवनेश कुमार पटेल थे। वहीं बैठक का संचालन प्रांतीय महामंत्री राकेश कुमार जायसवाल ने किया। इसके साथ ही बैठक को संबोधित करने वालों में उप प्रांताध्यक्ष जगदीश सिंह यादव, कोषाध्यक्ष कैलाश बैरागी, सुरसुरी प्रसाद पटेल, हीरानंद नरवरिया, बीएल सौराष्ट्रीय, श्रीमती कृष्णा बैरागी, संजीव सोनी, रामचंद्र मालवीय, ओम प्रकाश मालवीय, जय सिंह पटेल, अमर सिंह चंदेल, उदय सिंह मालवीय, बालकृष्ण पटेल, कालूराम परमार, सर्वेश सिंह, स्वरूप लड़िया, राकेश बागुल श्याम जायसवाल आदि शामिल रहे। बैठक में प्रदेशभर से आए सैकड़ों अधिकारी कर्मचारी शामिल हुए।

अपाक्स की प्रमुख मांगें, जिनके लिए होगा संघर्ष
-टीईटी की अनिवार्यता तत्काल समाप्त की जाए। सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश शासन द्वारा रिव्यू पिटीशन दाखिल की जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रहे।
-ओबीसी के 13% होल्ड पदों को तुरंत अनहोल्ड कर नियुक्तियां दी जाएं, जिससे हजारों युवाओं को उनका हक मिल सके।
-आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर सभी विभागों में नियमित भर्तियां की जाएं।
-निजी कंपनियों सहित उन सभी संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाए, जो शासकीय लाभ प्राप्त करती हैं।
-बैकलॉग के सभी पद तत्काल भरें जाएं, ताकि आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को उचित अवसर मिलें।