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छिंदवाड़ा में 'सियासी भीड़' और 'मौत' का कोहराम: सीएम की सभा से लौट रहे ग्रामीण कफन में लिपटे

  • अपनों की चीख और सत्ता के मरहम के बीच उठ रहे कई तीखे सवाल
  • अस्पताल में जुटे पक्ष-विपक्ष के विधायकों, नेताओं और पार्टी पदाधिकारी
  • मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन से मिलकर दुख बंटाया, आर्थिक मदद की

छिंदवाड़ा  (फरहान खान)।   उमरानाला के पास गुरुवार शाम जो खौफनाक मंजर दिखा, उसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री की जनसभा में 'दहाड़' सुनने गए ग्रामीणों को क्या पता था कि वापसी का सफर खामोशी की चादर ओढ़कर खत्म होगा। बस और पिकअप की उस भीषण टक्कर ने न केवल गाड़ियों के परखच्चे उड़ाए, बल्कि सरकारी दावों और स्वास्थ्य विभाग की बदहाली की भी कलई खोल दी है। इसमें दस ग्रामीणों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।




आधी रात का 'आपरेशन सेवा': जब एम्बुलेंस के लिए तरस गए घायल

हादसे के बाद जब सरकारी मशीनरी सुस्त नजर आ रही थी, तब रात 11 बजे से 2 बजे तक जिला अस्पताल सियासत नहीं, सेवा और संघर्ष का गवाह बना। छिंदवाड़ा और पांढुर्णा के तमाम कांग्रेस विधायक, जिलाध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे, सोनू मागो और पदाधिकारियों की फौज अस्पताल के गलियारों में डटी रही।


जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके ने मौके पर करवाई मदद

जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके ने व्यवस्था पर तल्ख तंज कसते हुए कहा— अस्पताल के हालात देखकर कलेजा मुंह को आता है। एक गंभीर मरीज तड़प रहा था, लेकिन उसे नागपुर ले जाने के लिए सरकारी एम्बुलेंस तक मयस्सर नहीं थी। हमने खुद कलेक्टर से संपर्क कायम किया और अपनी मौजूदगी में गाड़ी का इंतजाम कराया। उइके ने दो-टूक कहा कि मुख्यमंत्री को अभी मुआवजे के चेक से ज्यादा अस्पताल में दवाओं, खाने और मुकम्मल इलाज की फिक्र होनी चाहिए। विधायक उइके बोले-साहब, अभी नोट नहीं, डॉक्टर की जरूरत है।




जीतू पटवारी का सीधा वार: 'यह हादसा नहीं, प्रशासनिक कत्ल है!'

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार को घेरे में लेते हुए इसे 'प्रशासनिक हत्या' करार दिया। पटवारी ने आरोप लगाया— अपनी सभाओं में कुर्सियां भरने के लिए मासूम ग्रामीणों और मनरेगा मजदूरों पर कथित तौर पर सरपंच-सचिवों के जरिए दबाव बनाया गया। उन्हें डराकर बसों में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस दिया गया। क्या मुख्यमंत्री जी उन अफसरों पर एफआईआर करेंगे जिन्होंने इन गरीबों को मौत की बस में बैठने पर मजबूर किया?


बड़ा खुलासा: 'मिट्टी खोदने' के नाम पर 'मैदान' ले गए?

हादसे के बाद जो हकीकत छनकर आ रही है, वो रूह कंपा देने वाली है। परिजनों की सिसकियों में दबा एक बड़ा राज यह भी है कि कई ग्रामीणों को कथित तौर पर योजनाओं के लाभ का वास्ता देकर सभा की 'भीड़' बनाया गया था। एक बेबस शख्स ने रोते हुए कहा— मुझे तो लगा पत्नी मनरेगा में मिट्टी खोदने गई है, मुझे क्या पता था कि वो सभा में गई है। सवाल यही है कि क्या सत्ता की चमक के लिए गरीबों की जान का जोखिम लिया गया?





प्रभारी मंत्री की रात और मुख्यमंत्री की शाम: मुआवजे का मरहम

हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी मंत्री राकेश सिंह गुरुवार देर रात ही जबलपुर से छिंदवाड़ा पहुंचे और घायलों का हाल जाना। वहीं, आज (शुक्रवार) शाम 4 बजे खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मृतकों के गांव (करेर) पहुंचे और पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया। इसके बाद वे सीधे अस्पताल पहुंचे। सरकार ने मृतकों के लिए 4-4 लाख और घायलों के लिए 1-1 लाख रुपये की इमदाद (सहायता) का ऐलान किया है।


कमलनाथ-नकुलनाथ की संवेदनाएं: 'पहले जान बचाए सरकार'

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ ने इस हादसे पर गहरा रंज जाहिर किया है। कमलनाथ ने कहा कि हाईवे पर हुई यह दुर्घटना अत्यंत पीड़ादायक है। वहीं, नकुलनाथ ने प्रशासन से आग्रह किया कि मुआवजे की कागजी कार्रवाई से पहले घायलों को स्थानीय स्तर पर ही 'वर्ल्ड क्लास' इलाज मिलना चाहिए, ताकि किसी और की जान न जाए।




खास बात: सभा की तालियां तो खामोश हो गईं, पर अस्पताल के वार्डों में गूंज रही सिसकियां आज भी इंसाफ मांग रही हैं। सरकार की घोषणाओं का शोर बुलंद है, पर सवाल वही है— क्या 4 लाख रुपये किसी की जिंदगी की भरपाई कर पाएंगे?








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